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रेड िरबन ः एड्स की जानकारी कम कौतूहल ज्यादा

Deoria Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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सलेमपुर। डीएम कुमार रविकांत सिंह ने कहा कि पूर्वांचल गरीबी और रोगों से जूझ रहा है। एड्स साइलेंट किलर की तरह देवरिया को निगल रही है। एड्स की जब बात आती है तो हम चुप हो जाते हैं। यहां तक हम जांच कराने भी नहीं जाते हैं।
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एचआईवी के प्रति अपनी जागरूकता को आप घर-घर ले जाएंगे। डीएम गुरूवार को भटनी रेलवे परिसर में आयोजित रेड रिबन एक्सप्रेस के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। इसके पूर्व समारोह का उद्घाटन सपा विधायक गजाला लारी एवं सलेमपुर विधायक मनबोध प्रसाद ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। विधायक गजाला लारी ने कहा कि एड्स को जान लेना ही दवा है। जिसने एड्स को जान लिया। उसने इस रोग से छुटकारा पा लिया। विधायक मनबोध प्रसाद कहा कि मानव शृंखला बनाने जैसा कार्य करने के लिए डीएम को बधाई देता हूं। एमएलसी राम सुंदर दास ने भी कार्यक्रम की सराहना की। इस अवसर पर पं. योगेश्वर तिवारी, बबलू तिवारी, गिरिजा त्रिपाठी, प्राचार्य डा. अजय शुक्ल, बिंदा कुशवाहा, विजय गुप्त मुन्ना, रविंद्र राय, धनंजय तिवारी, दुर्गा शरण चंद्र कौशिक, डा. महेंद्र त्रिपाठी, रामाज्ञा कुमार, सपा जिलाध्यक्ष राम इकबाल यादव, पीके शर्मा, डा. सर्वानंद तिवारी समेत हजारों की तादात में लोग मौजूद रहे।
एक बार फिर मोहरा बने बच्चे
पोलियो समेत अन्य सरकारी जागरूकता कार्यक्रमों की तरह एड्स जागरूकता के लिए एक बार फिर बच्चों को ही हथियार बनाया गया। कालेज के छात्रों की बात कौन करे? एलकेजी, यूकेजी में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों को लाइन में खड़ा कर दिया गया था। जो बच्चे एड्स अथवा इससे संबंधित चीजों को दूर तक नहीं समझते हैं, वे अपने से बड़ों को किस तरह से जागरूक करेंगे, अंदाजा लगाया जा सकता है। सुबह सात बजे से ही छोटे-छोट बच्चों को लाइन में खड़ा कर दिया गया था। बच्चे अपने अध्यापक के डर से चुपचाप खड़े थे। भूख-प्यास से तड़पते बच्चों को कोई पूछने वाला नहीं था। भरौली गांव के सामने छोटे-छोटे बच्चों ने बताया कि सुबह सात बजे से खड़े हैं। भूख तो लगी ही है, ऊपर से कड़ी धूप भी है।
पानी के िलए तरसे लोग
एड्स जागरूकता के लिए के बुलाए गए लोग प्यास के मारे बेहाल थे। कई जगहों पर पानी की भारी किल्लत देखी गई। डीएम ने स्वयं अपने उद्बोधन में कहा कि आप लोगों को पानी तक नहीं पिला पाया हूं। स्थिति यह थी कि भटनी में पानी के लिए लोग आपस में जूझने की लगे। पानी के बोतलों के लिए छीना-झपटी शुरू हो गई। लोग पानी की तलाश में भटकते दिखे।
नहीं दिखे जनप्रतिनिधि
छोटे-छोटे बच्चों, बुजुर्गों तक को लाइन में खड़ा करा दिया गया था। परंतु जागरूकता के लिए न तो कोई जनप्रतिनिधि मानव शृंखला में खड़ा हुआ न ही कोई बड़ा अधिकारी। लोगों का मानना है कि यदि सांसद, विधायक, ब्लाक प्रमुख शृंखला में खड़े होते तो उसका कुछ संदेश पाजिटिव जाता और आम आदमी पर असर भी पड़ता।
विधायक समेत 71 ने किया रक्तदान
रेलवे परिसर में रक्तदान शिविर में सपा विधायक गजाला लारी समेत 71 लोगों ने रक्तदान किया। इसके अलावा करीब डेढ़ दर्जन स्टाल लगाए गए थे। जिनमें नेत्र रोग, हृदय रोग, हड्डी रोग आदि की जांच की गई। इसके अलावा पंजीकरण के लिए काउंटरों पर भारी भीड़ रही।
शृंखला में बुजुर्ग को लाया गया
भीड़ जुटाने के दबाव के चलते ग्राम प्रधानों ने गांव के बुजुर्ग महिला पुरुषों को भी उठा लाया था। भीड़ में डुमरिया निवासी राजधारी थे तो उनके साथ इसी गांव के 90 वर्षीय भिखी भी लाइन में थे। मझवलिया के 75 वर्षीय चन्नी मद्धेशिया और 70 वर्षीय राजमन दास भी एड्स की जागरूकता करने के लिए लाए गए थे। इन बुजुर्गों से पूछा गया कि आप क्या करने आए तो उनका जवाब था प्रधान जी ले बटोरले बान केहू साहब आवत बा।
अधूरी रही मानव शृंखला
कलेक्ट्रेट से लेकर भटनी तक 32 किलोमीटर मानव शृंखला बनाने का दावा जिला प्रशासन की तरफ से बढ़-चढ़कर कर किया जा रहा था। लेकिन 11 अक्टूबर को जब मानव शृंखला बनाने की बात आई तो जिला प्रशासन का दावा और तैयारी काम न आई। मानव शृंखला 11 अक्टूबर को सुबह सात बजे से बननी शुरू होकर दिन के दस बजे तक 32 किलोमीटर तक पूरी हो जानी थी। देवरिया कस्बे के स्कूलों/कालेजों, आशा और आंगनबाड़ी वर्करों के बल पर जिला जेल के समीप तक शृंखला बन तो गई थी, लेकिन भटनी तक कहीं भी लगातार शृंखला नहीं बन पाई थी।

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