सेहत न बिगाड़ दें खूबसूरत फल-सब्जियां

Deoria Updated Sat, 06 Oct 2012 12:00 PM IST
रुद्रपुर। बाजार में खूबसूरत और ताजे दिखने वाले फल और सब्जियों से आपको सावधान रहना होगा। कारोबारी ज्यादा पैदावार और बिक्री के चक्कर में इनके साथ हानिकारक केमिकल का उपयोग करने लगे हैं। ऐसे में फल दिखने में तो काफी सुंदर दिख रहे हैं पर इनके खाने के बाद लोगाें की सेहत बिगड़ जा रही है।
बाजार में बिक रहे फल और सब्जियाें के प्राकृतिक रंग बदल गए हैं। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए इन पर आर्टिफिशियल रंग चढ़ा दिया जा रहा है। यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। बाजार में बिक रहे अधिकांश पीले रंग के केलों और परवल पर हाथ रगड़ने से रंग छूटने लग रहा है। एक कारोबारी ने बताया कि केले की घार को पकाने के लिए कार्बाइड का प्रयोग किया जाता है। उसे 20 लीटर पानी में केमिकल डालकर छोड़ दिया जाता है। 24 घंटे बाद केला पीले रंग में पक कर तैयार हो जा जाता है। यह देखने में भी ताजा लग रहा है। इसी तरह बाजार में आई सब्जियाें को बढ़ाने का काम किया जा रहा है। खास कर टमाटर और बैंगन को तैयार करने के लिए खतरनाक हथकंडा अपनाया गया है। इन सब्जियों में अल्कोहलिक घोल और ऑक्सीटोसीन का इंजेक्शन लगाया जा रहा है। इस इंजेक्शन का इस्तेमाल करने से सब्जी का आकार और वजन बढ़ जाता है। इससे विक्रेताओं को ज्यादा लाभ मिलता है। नवरात्र में फलों की बिक्री को देखते हुए बडे़ कारोबारियाें ने अभी से कच्चे केले की खेप को मंगाने के आर्डर दे रखे हैं। एक व्यापारी ने कहा कि रंगी हुई सब्जियां और फल ज्यादा अच्छे दिखते हैं इसलिए उनकी खपत अधिक होती है।
नवरात्र में बढ़ जाती है डिमांड
केमिकल युक्त सब्जियां और फल बेचने वाले व्यापारियों की नवरात्र में चांदी रहती है। यह लोग त्योहार को देखते हुए बड़े पैमाने पर रंगे हुए फल और सब्जियों मंगाते हैं। आमतौर पर फलों व सब्जियों को रंगने का काम मुख्य बाजार में ही होता है। एक व्यापारी ने बताया कि कच्चे फल मंगाने में नुकसान कम होता है। मंडी में ही इन्हें रंगा जाता है।
लीवर पर पड़ता है असर: डा. राजेश
डा. राजेश सिंह बताते हैं कि ऐसे हानिकारक केमिकलों के प्रयोग से तैयार हो रहे फल और सब्जियों के सेवन से लीवर पर खास असर पड़ता है। केमिकल लगाकर पकाए केले खाने से गला धीरे-धीरे बैठने लगता है। केले को कार्बाइड से पकाने के बाद मिठाई में पड़ने वाले पीले रंग के केमिकल में डाला जाता है। फल, सब्जियों और मिठाई में ऐसे रंगों का प्रयोग लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है।
अभियान चलाकर होगी जांच : खाद्य निरीक्षक
सलेमपुर, देवरिया और रुद्रपुर के खाद्य निरीक्षक बिजेंद्र कुमार ने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने को छापेमारी कर नमूना लिया जाता है। रुद्रपुर में आधा दर्जन नमूनों को जांच के लिए भेजा गया है। इनकी रिपोर्ट आने पर आरोपितों के ऊपर कार्रवाई की जाएगी। हर तीसरे माह खाद्य पदार्थों की जांच की जा रही है। नवरात्रि के त्योहार के दौरान पूरे जनपद में अभियान चलाकर फलों और सब्जियों के नमूने लिए जाएंगे। इसमें दोषी पाए जाने पर कठोर दंड का प्रावधान है।

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