छात्र हैं, शिक्षक नहीं, पंखा है बिजली नहीं

Deoria Updated Sat, 06 Oct 2012 12:00 PM IST
देवरिया। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा व्यवस्था को बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार सेे सहायता प्राप्त, गैर सहायता प्राप्त सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं छह माह के भीतर मुहैया कराने का निर्देश दिया है। बावजूद जिले के परिषदीय विद्यालयों में छात्रों की संख्या के सापेक्ष न तो शिक्षक हैं और न ही विद्यालयों में बच्चों के बैठने और उनके लिए शुद्ध पेयजल की ही व्यवस्था है। क्लासरूम में बच्चे जमीन पर पढ़ने को मजबूर हैं। अमर उजाला टीम ने कई प्राथमिक विद्यालयों का जायजा लिया तो यह बात उभर कर सामने आयी की परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा के भरोसे बच्चों का नैया पार लगना संभव नहीं है। विद्यालयों में छात्र हैं शिक्षक नहीं और पंखा भी लगा है लेकिन बिजली का पता नहीं है।
तीन कक्षों में संचालित होती हैं दो स्कूलों की 10 कक्षाएं
बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत प्राथमिक विद्यालयों में एक कक्षा में 35 बच्चे ही बैठकर पढ़ सकते हैं। इसके बावजूद राघवनगर स्थित स्वामी विवेकानंद प्राथमिक विद्यालय के तीन कक्षों में स्वामी विवेकानंद प्राथमिक विद्यालय के अलावा रामकृष्ण परमहंस प्राथमिक विद्यालय की भी पढ़ाई होती है। इन दस कक्षाओं के 225 छात्रों की पढ़ाई होती है। दस कक्षाओं के 225 छात्रों को पढ़ाने के लिए मात्र एक शिक्षक की तैनाती है। ऐसे में एक कक्ष में 75 छात्र कैसे बैठते हैं। यह सवाल विभाग के असलियत की पोल खोल रही है। वैसे तो मौके पर दोनों विद्यालयों के मात्र 100 छात्र ही उपस्थित थे। यहां एक कक्ष में दोनों विद्यालयों के कक्षा एक व दो के 45 छात्रों को दो शिक्षामित्र तथा दूसरे कक्ष में पांचवीं के 15 छात्रों को एक अध्यापिका, तीसरे कक्ष में कक्षा तीन और चार के 45 छात्रों को दो शिक्षामित्र पढ़ाते मिले। स्थिति यह रही की दो शिक्षामित्र एक कक्ष में कैसे पढ़ाते हैं यह सुनकर कर ताज्जुब तो हो रहा है लेकिन यह सच है।
कहीं भी नहीं दिखे ड्रेस में विद्यार्थी
परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को दो अक्टूबर तक ड्रेस मुहैया कराए जाने का निर्देश था। इसके लिए शासन से धन भी आहरित कर दिया गया है। प्रत्येक छात्र पर चार-चार सौ रुपये ड्रेेस के मद में खर्च किए जाने हैं। सरकार कान्वेंट विद्यालयों की तरह प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को भी ड्रेस के साथ बच्चों के लिए टाई और लड़कियों को चुन्नी अनिवार्य है। टाई और चुन्नी की बात कौन कहे कोई भी छात्र ड्रेस में नहीं दिखा।
बेंच है लेकिन पढ़ते हैं जमीन पर
उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों के बैठने के लिए बेंच और मेज की व्यवस्था तो है लेकिन बच्चे जमीन पर ही बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। यह स्थिति एक विद्यालय में नहीं बल्कि कई विद्यालयों में देखने को मिला। वार्ड नंबर 13 के दयानंद पूर्व माध्यमिक विद्यालय में तो बरामदे की जमीन पर कक्षा सातवीं और आठवीं की आठ छात्राएं जमीन पर बैठकर पढ़ रही थी। उनके बैठने के लिए चटाई की भी व्यवस्था नहीं थी। वैसे तो यहां कमरों में बेंच और मेज पड़ा था। विद्यालय की छात्र आरती, अंजना, आराधना, कुसुम ने बताया कि मैडम यहीं पढ़ने के लिए बोली है इसलिए जमीन पर बैठकर पढ़ना पड़ता है। इसके चलते कपड़े भी गंदे हो जाते हैं। यहां की स्थिति यह रही कि 63 बच्चों में केवल 15 बच्चे ही स्कूल में पढ़ते मिले।
दूषित जल पीते हैं स्कूली बच्चे
शहर के आधा दर्जन विद्यालयों में शुद्ध पेय जल की व्यवस्था नहीं है। राघव नगर विद्यालय में दो प्राथमिक तथा एक जूनियर विद्यालय संचालित है लेकिन यहां बच्चों के पीने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं है। विद्यालय में कार्यरत शिक्षामित्र प्रशांत तिवारी ने बताया कि सब सुविधा मुहैया के बावजूद बच्चे यहां से काफी दूर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही के घर जाकर पानी पीते हैं। यही हाल देवरिया खास स्थित वार्ड नंबर 13 के दयानंद प्राथमिक तथा दयानंद पूर्व माध्यमिक विद्यालय की भी है। यहां पर हैंडपंप तो है लेकिन वह प्रदूषित पानी देता है। पानी में बदबू होने के चलते बच्चे अन्यत्र जाकर पानी पीते हैं।
1600 विद्यालयों का नहीं हुआ विद्युतीकरण
छात्रों को गर्मी से निजात दिलाने के लिए शासन स्तर से विद्यालयों में वायरिंग और कमरों में पंखों की व्यवस्था की गई है। जिले के 2577 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से केवल 912 विद्यालयों को ही विद्युतीकरण किया गया है। इसमें भी अधिकांश विद्यालयोें के पंखे चोरी हो गए हैं।
600 स्कूलों में नहीं है चूल्हे
मध्यान्ह भोजन अनिवार्य है। पर बनेगा कैसे इसके लिए अभी तक कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। लकड़ी की किल्लत के चलते कई विद्यालयों में बच्चों का भोजन नहीं बन रहा है। शिक्षकों ने बताया कि जहां गैस की व्यवस्था है भी तो वहां समय से गैस नहीं मिल रहा है।
981 शिक्षकों का पद है रिक्त
जिले के 1855 प्राथमिक और 731 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कुल 4795 शिक्षकों की तैनाती है। जबकि इन विद्यालयों में कुल 5776 शिक्षकों की जरूरत है। ऐसे में 981 शिक्षकों की कमी के चलते शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। जब तक शासन स्तर से इन पदों पर नियुक्ति नहीं होती शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हो सकता।
विद्यालयों की व्यवस्था सुदृढ़ किए जाने के लिए शिक्षकों का समायोजन कर दिया गया है। समायोजन लागू होते ही पठन पाठन की व्यवस्था सुदृढ़ की जाएगी साथ ही अन्य सुविधाएं भी मुहैया होगी।
एमए अंसारी, बीएसए देवरिया।

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