जिले में नहीं ठहर पाते घोटाले की जांच कराने वाले

Deoria Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
देवरिया। गरीब लहरों पे पहरे बिठाए जाते हैं, समंदर की तलाशी कोई नहीं लेता। यहां दशक भर में हुए इंदिरा आवास घोटाले पर यह लाइन सटीक बैठ रही है। 50 करोड़ के इस घोटाले की जांच को हाथ जिसने भी आगे बढ़ाया, वह जिले में ठहर नहीं पाया। चौथी बार पिछले माह शुरू हुई जांच फिर ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।
जिले में इंदिरा आवास आवंटन में भारी पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। जिम्मेदार अपात्रों को योजना का लाभ पहुंचाए हैं। आम गरीबों को अब भी पक्का छत नसीब नहीं हो सका है। जबकि लाखों इंदिरा आवास भूजे की तरह यहां बांट दिया गया है। धांधली से जब पर्दा उठा तो जांच बैठा दी गई। मगर जांच को जिसने भी हाथ आगे बढ़ाया वह जिले में ठहर नहीं पाया। वर्ष 06-07 और वर्ष 07-08 में जिले के 2100 राजस्व गांवों में 1800 गांवों को दरकिनार कर सिर्फ 300 गांवों में छह हजार से ज्यादा इंदिरा आवास भूजे की तरह बांट दिया गया।
इसमें सात करोड़ 72 लाख रुपये धांधली की बात सामने आई। इसकी भनक कहीं से तत्कालीन सीडीओ हरेन्द्रबीर सिंह को लगी और उन्होंने जांच बैठा दी। जांच प्रक्रिया अभी शुरू हुई थी उनका स्थानांतरण शासन में हो गया और मामला दबा दिया गया। इस धांधली पर अभी पर्दा भी नहीं पड़ा था कि वर्ष 09-10 में 31 मार्च को रातोंरात 18 करोड़ रुपये का बैक डेट में चेक काट दिया। इसमें 16 करोड़ रुपये का चेक अपात्रों के नाम काटे जाने की बात सामने आई। तत्कालीन मंडलायुक्त पीके महांति ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच शुरू कराया।
गठित टीम विकास भवन पहुंच जांच की। धांधली की पुष्टि हुई और रिपोर्ट भी शासन को भेजा गया, लेकिन इस बार फाइल शासन में अटक गई। जांच के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर घपलेबाजों के हौसले और बुलंद हो गए। जिसका नतीजा यह हुआ कि वर्ष 10-11 बीपीएल सूची को दरकिनार कर लगभग सात हजार इंदिरा आवास बांट दिया गया।
सूची का मिलान होने के बाद खुलासा होने के पर तत्कालीन डीएम ऋषिकेश भाष्कर यशोद और सीडीओ सरोज कुमार ने जांच शुरू कराया। दोनों अफसरों की सख्ती के चलते घपलेबाजों की मुश्किलें बढ़ गई। मगर संयोग ऐसा हुआ कि इसी बीच विधानसभा चुनाव हुआ और सत्ता बदलते ही ये अफसर भी बदल दिए गए। जिसका नतीजा यह हुआ कि जांच फिर अधर में लटक गई और धांधली जारी रही। लगातार हो रही धांधली की भनक कहीं से सीडीओ एस. राजलिंगम को लगी। वह वर्ष 06 से 30 जून 2012 तक जारी इंदिरा आवास की जांच शुरू करा दी। जांच की जिम्मेदारी जिले के 1017 प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को मिली।
जांच टीम की मानिटरिंग के लिए हर ब्लाकों में एक-एक जिलास्तरीय अधिकारी प्रभारी बनाए गये। जांच पड़ताल शुरू हो गया और 15 दिन में रिपोर्ट देना था कि इसी बीच उनका प्रमोशन हो गया और वह औरैया के लिए स्थानांतरित हो गए। अब देखना है कि नवागत सीडीओ इस धांधली पर क्या कर रहे हैं।

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