रुद्रपुर के रामचक में मिली पांच फीट की दुर्लभ मूर्ति

Deoria Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
रुद्रपुर। बृहस्पतिवार को रामचक गांव ठाकुर द्वारा मंदिर परिक्षेत्र से पांच फिट की दुर्लभ मूर्ति प्राप्त हुई। मूर्ति, मंदिर के बगल में जमीन में दबी थी। सड़क की मिट्टी साफ करते समय कुदाल से टकराने के बाद गांव के युवक मूर्ति को खोद कर निकाले। जमीन से मिली मूर्ति को देखने के लिए रामचक गांव में लोगों का मजमा लग रहा है।
मूर्ति को पत्थर पर तराशा गया है। नृत्य करती हुए मुद्रा में देवियों की तीन प्रतिमाएं है। मूर्तियों पर सुंदर ढंग से नक्काशी की गई है। ऐसी कलाकृतियां मध्यप्रदेश के खजुराहो मंदिर में देखने को मिलती हैं। प्राचीन ठाकुर द्वारा मंदिर के पुजारी रामजी दास ने मूर्ति को साफ कर मंदिर परिसर में दर्शन को रखा है। मूर्ति मिलने की सूचना पुरातत्व विभाग को दे दी गई है। रक्षा राव राजनाथ राव महाविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डा.शैलेंद्र मिश्र के अनुसार राजचक गांव में मिली मूर्ति मध्यकाल की प्रतीत हो रही हैं। 10 शताब्दी में ऐसी कलाकृतियों का प्रचलन रहा है। बुंदेलखंड के चंदेल शासक पत्थरों पर तराशी गई कलाकृतियों के शौकीन थे। उन्होंने कहा कि कालांतर में रुद्रपुर मूर्ति कला का केंद्र रहा है। यहां मध्यकालीन युग की कई कलाकृतियां जमीन से प्राप्त हो चुकी हैं। उपजिलाधिकारी ब्रजेंद्र द्विवेदी ने कहा कि पुरातात्विक महत्व के इस परिक्षेत्र को संरक्षित करने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा।
संरक्षण के अभाव में मिट रही धरोहर
रुद्रपुर। जमीन से पांच फिट की दुर्लभ मूर्ति मिलने के बाद रामचक गांव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। यहां हजारों वर्ष का इतिहास मिट रहा है। बेशकीमती प्राचीन मूर्तियों और 150 बीघा जमीन से संपन्न ठाकुरद्वारा न केवल खंडहर में तब्दील हो रहा है बल्कि मंदिर की उपजाऊ भूमि पर भूमाफिया कब्जा कर लिए हैं।
25 वर्ष पहले ठाकुर द्वारे के मंदिर से 2.5 फुट लंबी काले पत्थर की भगवान चतुर्भुजी बेशकीमती मूर्ति चोरी हो गई। बताया जाता है कि मूर्ति तस्कर पंजाब की सीमा पार करते हुए पकडे़ गए। इस मंदिर की मूर्ति अब बनारस के एक संग्रहालय में रखी गई है। ठाकुर द्वारे के निर्माण में प्रयुक्त ईंटें ईसा पूर्व की लगती हैं। क्षतिग्रस्त द्वार के अवशेष आज भी इसकी कहानी बयां कर रहे हैं। मंदिर में पत्थर की ओखल और पत्थर की परात मौजूद है। शालीग्राम के सैकड़ों पत्थर के अलावा शिव, विष्णु और सूर्य की प्रतिमा बना विशाल द्वार का अवशेष पुरातात्विक अन्वेषण की वस्तु हैं। बताया जाता है कि रामचक गांव पहले ठाकुरद्वारा के नाम से जाना जाता था। इस मठ और मंदिर की व्यवस्था विष्णु संप्रदाय के संतों के जिम्मे थी। सत्रहवीं शताब्दी में सिराजुदौला वंश के एक शासक आशिक दौला ने मंदिर को 150 बीघे जमीन दी। रामचक और बेलवा दुबौली में स्थित इन जमीनों के राजस्व अभिलेखों में आज भी ठाकुर जी का नाम दर्ज है, पर इन जमीनों पर भूमाफिया कब्जा जमाए हैं। मंदिर के पुजारी रामजी दास ने कहा धन संपदा रहने के बाद भी ठाकुरद्वारा विपन्नता झेल रहा है। उपजिलाधिकारी ब्रजेंद्र द्विवेदी ने कहा कि तहसील प्रशासन ठाकुरद्वारे की जमीनों की खोजबीन करवाएगा।

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