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एसपी का तबादला, सियासी साजिश!

Deoria Updated Thu, 02 Aug 2012 12:00 PM IST
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देवरिया। जिले में चार माह पहले बतौर एसपी तैनात हुईं शची घिल्डियाल के तबादले पर दबी जुबान से पूरे जनपद में चर्चा और कयासों का बाजार गर्म है लेकिन वही बात संकेतों में मजबूती से बुधवार शाम को पुलिस लाइन में निवर्तमान एसपी के विदाई समारोह में मातहतों की जुबान से प्रकट हुई। उन्होंने खुलकर कहा कि इनके रहते इन्हें कभी किसी राजनीतिक या सियासी दबाव को नहीं झेलना पड़ा और निर्भीकता से ऐसे दबाव से मुक्त रहकर न्यायसंगत कदम उठाने का जज्बा मिला। न्याय के लिए जरूरी हुआ राजनीतिक दल से जुड़े लोगों पर बेहिचक कार्रवाई को संरक्षण मिला।
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अपर पुलिस अधीक्षक दिनेश पाल सिंह ने कहा कि अपने 30 साल के पुलिस की नौकरी में गत चार माह में उन्होेंने 30 साल पुराने आदर्श परिपाटी और तेवर वाले अधिकारी को पाया था जो कि अब दुर्लभ है। सदर कोतवाल सारनाथ सिंह ने कहा कि एक अधिवक्ता के दबाव में पुलिस कर्मी पर मुकदमा दर्ज करने का मौका आया तो इन्हीं एसपी ने पुलिस कर्मी की तहरीर पर भी मुकदमा दर्ज करने को कहा था। इससे आम सिपाही को खासा मनोबल मिला था। रुद्रपुर कोतवाल सुखबीर सिंह ने एक प्रसंग के मार्फत अपनी बात रखी। कहा कि प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत की खबर तब गली से गुजर रहे एक शराबी को मिली तो उसकी प्रतिक्रिया थी कि वह पौव्वा था लेकिन काम पूरे बोतल का कर गया। मईल एसओ डा. उपेंद्र राय ने कहा कि संक्षिप्त कार्यकाल में अपनी कार्यशैली का मातहतों पर ऐसा अमिट प्रभाव छोड़ने वाला अधिकारी उन्होंने पहली बार देखा है। अंत में एसपी शची घिल्डियाल ने लखनऊ में अपनी नई तैनाती पर मिले मोबाइल के सीओजी नंबर को बताया। फिर कहा कि तबादला नौकरी का रूटीन हिस्सा है। जो भी अच्छा या बुरा हुआ, उसका श्रेय पूरी टीम को है। चलते-चलते मातहतों को मंत्र दिया कि सही निर्णय लेने को स्वविवेक का इस्तेमाल करें। संचालन सीओ सिटी प्रद्युम्न सिंह ने किया। इस दौरान प्रशिक्षु सीओ मनोज यादव, एसओजी प्रभारी अतुल नारायण सिंह, एसओ विभा पांडेय समेत जिले के सभी पुलिस अधिकारी सादे वेश में मौजूद थे।
अफसरों में दिखी ट्रांसफर की कसक
देवरिया। जिले की पहली महिला पुलिस कप्तान शची घिल्डियाल के ट्रांसफर से पुलिस सकते में हैं। एसपी के जाने पर कई पुुलिस अफसरोें की जुबान पर ट्रांसफर का कसक आ ही गई। दबी जुबान सभी ने कहा कि आखिरकार कानून को लेकर कर्मठता पर सियासत भारी पड़ी है। निष्पक्ष और ला एंड आर्डर को लेकर कडे़ तेवर की कार्यशैली एसपी के ट्रांसफर का कारण बन गया। ट्रांसफर की पृष्ठभूमि पिछले तीन माह पहले से बन रही थी। प्रदेश में सपा राज आते ही मार्च में जिले में महिला पुलिस कप्तान की तैनाती हुई। पद भार ग्रहण करते ही उनकी हनक दिखने लगी।
सत्ताधारी दल के नेताओं के कुछ काम में जिले की पुलिस रोड़ा बनने लगी। शची का ला एंड आर्र्डर जिले के कुछ सपाइयों को कांटा की तरह चुभ रहा था। सपाइयों ने पार्टी हाईकमान से शिकायतों की झड़ी लगा दिए थे। कद्दावर सपाइयों के जिले में पहुंचने पर सपाई अपना दुखड़ा सुनाने से तनिक भी नहीं हिचके। मामला यहीं से शुरू होता है कि सूबे के एक मंत्री ने एसी शची को डांक बंगले पर मिलने के लिए बुलाया। कप्तान से मिलने से साफ इनकार कर दिया। एसपी की मनाही मंत्री को नागवार लगी। कार्यकर्ताओं के बीच ही मंत्री ने कहा भी दिया। अब एसपी एकाध माह की मेहमान है। दूसरा प्रकरण बालू खनन के मामले में पक डे़ गए सपा नेता की गिरफ्तारी थी।
जिले के सपाइयों ने कोतवाली में पहुंच गिरफ्तार सपा नेता को छोड़ने का दबाव बनाया। मगर एसपी ने किसी की एक न सुनी। अंतत: सपा नेता को जेल जाना पड़ा। उल्टे सपा के एक पूर्व विधायक को कोतवाली में बेइज्जत भी होना पड़ा। तीसरा मामला सपा के एक पूर्व सांसद का है। पूर्व सांसद का काम करने से जब एसपी ने मना कर दिया तो सपा नेता ने उनके खिलाफ पर्चे भी बंटवाए। लखनऊ तक शिकायत की। मगर एसपी साहिबा टस से मस नहीं हुईं। आए दिन वाहन चेकिं ग के दौरान पकडे़ गए वाहनों को छुड़ाने के लिए सपाइयों का दबाव पड़ता था। थानेदार सीधे कहते थे एसपी महोदया से बात करिए। यह बात सपा नेताओं को अक्सर नागवार लगती थी। इसके बाद तो सपा नेताओं ने एसपी के ट्रांसफर के लिए अभियान चला दिया। बडे़ नेताओं के सामने सपाई यह कहने लगे कि अगर यह एसपी दो चार माह और रह गई तो सपा पांच हजार वोट के लिए भी महंगी हो जाएगी।

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