किशोरी के साथ दुष्कर्म

Deoria Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
इंदूपुर/गौरीबाजार। थाना क्षेत्र के बखरा चौराहे के पास एक गांव में रहने वाली 13 वर्षीया किशोरी को एक युवक ने हवस का शिकार बना डाला और जान से मारने की धमकी भी दी।
रात में हालत खराब होने पर बड़ी बहन ने चिकित्सक के यहां पहुंचाया तो मामला खुला। घटना 27 की सायं करीब चार बजे हुई। आरोपी मंगलवार शाम तक पुलिस की पकड़ से दूर था और पुलिस ने उसके परिजनों को थाने में बिठा रखा है। पीड़िता के पिता और भाई मुंबई में कमाते हैं। घटना वाले दिन मां बाबाधाम गई हुई थी। 27 जुलाई की सांय करीब चार बजे खेत जाते समय किशोरी से गांव के एक युवक ने गन्ने की खेत में दुष्कर्म किया।
किशोरी घर पहुंची और किसी को बिना कुछ बताए लेट गई, रात में उसकी हालत खराब हो गई। बहन इलाज के लिए अस्पताल ले गई और वहां चिकित्सक ने दुराचार होने की आशंका जताई। तहरीर दिए जाने पर एसओ उपेंद्र यादव ने गन्ने के खेत पर जाकर मुआयना किया और आरोपी के खिलाफ नामजद केस दर्ज कर लिया।

20 हजार रुपये लगाई इज्जत की कीमत
इंदूपुर/गौरीबाजार। तेरह वर्षीया किशोरी की अस्मत वहशी ने लूट ली और इस बारे में पीड़िता और उसके परिजनों को जुबान बंद रखने या फिर राजीनामा करने के लिए 20 हजार रुपये की कीमत का आफर दिया गया। हैरानी वाली बात यह कि वहशी को बचाने के इस काम में कानून के कुछ रखवाले भी शुमार हो लिए। अदालत में मामले के सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं की ओर से सरेआम जलील कर देने वाले सवाल सरीखे वाकये पेश आने का डर दिखाकर दबाव बनाने की कोशिश हुई। इससे अजीज आकर पीड़िता की मां ने भी अपना फैसला सुनाया कि जब बच्ची की इज्जत की कीमत ही देनी है तो पांच लाख रुपये दिए जाएं। इसके बाद दबाव बनाने वाले पीछे हटे।
बखरा चौराहे के पास हुए दुराचार के मामले में आरोपी पर मामला दर्ज करने से पहले परदे की ओट में पीड़िता पर बने दबाव की पुरजोर कोशिश की गई। थानाधिकारी तो इस पूरे मामले से खुद को अनजान बताते हैं। लेकिन थाने से जुड़े सूत्रों ने संकेतों में सवाल दागा कि अगर 27 जुलाई को घटना हुई और दूसरे दिन उसकी तहरीर कानून के रखवालों को मिली तो क्या वजह है कि मुकदमा 31 जुलाई को दर्ज किया गया। इतना समय दोनों पक्षोें में रजामंदी की इंतजारी में बीतने दिया गया? सूत्रों की मानें तो थानेदार के एक विश्वस्त सिपाही राजीनामा कराने को पीड़िता पर दबाव बनाने वालों में अग्रणी भूमिका में थे। लेकिन अंतिम क्षण तक पीड़िता के मां का आरोपी को सजा दिलाने पर अडिग रहने पर सिपाही भी बीच से हटने में ही अपना भला समझा। दरअसल पीड़िता की मां दबाव बनाने वालों के सामने एक और विकल्प पेश की। वह यह कि आरोपी के साथ पीड़िता का ब्याह करा दिया जाए लेकिन आरोपी के परिजन और उसके पैरोकार राजी नहीं हुए। इसके बाद पीड़िता की मां उक्त आखिरी विकल्प पेश किया तो सभी एकदम से पीछे हट लिए।

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