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मांगी सूचना तो बैंकों ने ढूंढ लिए कई बहाने

Deoria Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
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देवरिया। आरटीआई एक्ट के तहत सूचना देकर भले ही पारदर्शी बनाने संवैधानिक व्यवस्था कर दी गई हो। मगर जिम्मेदार इसे धरातल पर लाने को तैयार नहीं हैं। सूचना मांगने पर न देने के लिए तरह-तरह अफसाने गढ़ दिए जा रहे हैं। आरटीआई कार्यकर्ता राघवेंद्र सिंह राकेश ने भी जब समाज कल्याण की ओर से कुछ योजनाओं के दिए धन की बाबत बैंकों से सूचना मांगी तो उनके साथ भी ऐसा ही सलूक किया गया। अलग-अलग बैंकाें ने अलग-अलग बहाने बनाए हैं। छात्रों को उच्च शिक्षा में छात्रवृत्ति के रुप में राज्य सरकार की ओर से समाज कल्याण विभाग हर वर्ष लाभार्थियों के लिए मोटी धनराशि देती है।
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जो विभाग की ओर से विभिन्न विद्यालयों के छात्रों के खाते में भेजा जाता है। इसी निमित्त आरटीआई कार्यकर्ता राघवेंद्र सिंह राकेश ने जिले के एसबीआई, यूबीआई, बैंक आफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक, केनरा बैंक, इलाहाबाद बैंक, पूर्वांचल ग्रामीण बैंक, पीएनबी, ओरियंटल बैंक आफ कामर्स से तीन बिंदुओं पर सूचना मांगी है। राकेश ने वर्ष 05 से वर्ष 2011 तक छात्रवृत्ति मद में कितनी धनराशि भेजी गई। छात्रों के खाते में धनराशि स्थानांतरण के उपरांत त्रुटिपूर्ण/आपत्तियुक्त खातों से छात्रवृत्ति धनराशि का विवरण जो संबंधित शाखा की ओर से विभाग को वापस की गई है। इन्हीं बिंदुओं पर पिछड़ा वर्ग कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से सूचना मांगी है। मगर बैंकों ने छह माह से भी ज्यादा बीत जाने के बाद भी मांगी गई सूचना नहीं दी है। इलाहाबाद बैंक के सहायक प्रबंधक एलबी प्रभाकर ने मांगी गई सूचना संबंधित विभाग के सक्षम अधिकारी से मांगने की नसीहत दी है।

केनरा बैंक के जन सूचना अधिकारी ने कहा कि उनके वहां उक्त विभागों के खाता ही नहीं है। सेंट्रल बैंक के उप महाप्रबंधक ने कहा है कि जिस प्रारूप में सूचनाएं मांगी गई है। वह प्रारूप शाखा की ओर से तैयार नहीं की जा सकती। बैंक आफ बड़ौदा के जनसूूचना अधिकारी डा. एम एस फोगाट ने कहा है कि उक्त विभागों से संबंधित सूचना विभागवार रिकार्ड उपलब्ध नहीं है। यूनियन बैंक के कार्यालय प्रभारी ने कहा है कि मांगी गई सूचना से बैंक संसाधन का दुरुपयोग व विचलन होगा। एसबीआई के महाप्रबंधक नेटवर्क ने कहा है कि आरटीआई अधिनियम आठ (एक) के तहत सूचना उपलब्ध नहीं कराया जा सकता।

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