जाति के लिए अध्यादेश तो धर्म के लिए क्यों नहीं

Gorakhpur Bureauगोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 26 Nov 2018 12:06 AM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
फोटो समाचार...
विज्ञापन

धर्मसभा पर टिकी रहीं लोगों की निगाहें
हर पल की गतिविधियों पर नजर गड़ाए रहे लोग
चौक-चौराहों पर होती रही चर्चा, सड़कों पर कम थी चहल-पहल
किसी ने चुनावी हथकंडा बताया तो किसी ने नेताओं से शांति बनाने की अपील की
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। अयोध्या में आयोजित धर्मसभा पर रविवार को हर किसी की निगाहें टिकीं रहीं। छुट्टी के दिन लोग टीवी के सामने बैठकर हर गतिविधि की जानकारी जुटाने में लगे रहे। कई लोग अयोध्या गए अपने संबंधियों, परिचितों से संपर्क कर वहां के माहौल का अंदाजा लगा रहे थे। उधर, सड़कों पर अन्य दिनों की अपेक्षा चहल-पहल कम रही। चौक-चौराहों पर जुटे लोग राम मंदिर निर्माण को लेकर बहस में मशगूल दिखे। प्राइवेट बसों से कार्यकर्ताओं के अयोध्या जाने के कारण सड़कों पर बसों का भी टोटा रहा। रोडवेज बसों के जरिए लोग यात्रा करते दिखे। धर्मसभा को लेकर पिछले कई दिनों से तैयारियां जारी थीं। विभिन्न राजनीतिक व हिंदूवादी संगठनों के लोग अलग-अलग बैठकें कर अयोध्या में आयोजित धर्मसभा में शामिल होने की रणनीति बनाने में जुटे रहे। शनिवार को ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं का जत्था अलग-अलग वाहनों से अयोध्या के लिए रवाना हुआ तो तमाम लोग सुबह निजी वाहनों से गए। चौक-चौराहों पर हर तरफ अयोध्या का मुद्दा ही गर्माया रहा। हर कोई अपने तर्कों से आंदोलन के पक्ष-विपक्ष में विचार रखता रहा। उधर, अयोध्या की गतिविधियों को देखते हुए पुलिस महकमा भी अलर्ट पर रहा।

इनसेट
सोशल मीडिया पर चली धर्मसभा की चर्चा
अयोध्या में आयोजित धर्मसभा की चर्चा सोशल मीडिया पर खूब हुई। विभिन्न पार्टियों के समर्थक राम मंदिर पर दिए अपने नेताओं के बयान सोशल मीडिया के जरिए साझा करते रहे। योगी आदित्यनाथ की ओर से भगवान श्रीराम की भव्य मूर्ति स्थापना को लेकर तमाम मैसेज वायरल होते रहे। कई भड़काऊ पोस्ट भी सोशल मीडिया में वायरल हुए।

प्रतिक्रिया
आंदोलन सिर्फ चुनावी स्टंट
अयोध्या में धर्मसभा का आयोजन एक प्रकार का चुनावी स्टंट है। अयोध्या में भीड़ जुटाकर जिस तरह स्टंट किया जा रहा है अगर कोई हादसा हो तो जिम्मेदार कौन होगा। मंदिर निर्माण के प्रति इतनी ही निष्ठा है तो एससी/एसटी एक्ट की तर्ज पर सरकार अध्यादेश क्यों नहीं लाती।
-सिंहासन गिरि, अधिवक्ता, बार एसोसिएशन अध्यक्ष।

आपसी समझ से हो मंदिर का निर्माण
राम मंदिर किसी धर्म विशेष का नहीं बल्कि भारत की अस्मिता का प्रतीक है। आपसी समझ से इसका निर्माण होना चाहिए। इसमें अब कोई बहानेबाजी नहीं चलने वाली। जनता समझदार है सभी वादे और दावों पर विचार करके वोट करेगी।
-डॉ. प्रेमशीला शुक्ला, रिटायर्ड प्रोफेसर, बीआरडी कॉलेज।

मंदिर-मस्जिद से जरूरी है शांति व्यवस्था
मंदिर बने या मस्जिद, देश में शांति व्यवस्था जरूर कायम रहनी चाहिए। पक्ष विपक्ष को चाहिए कि वह मिल बैठकर समस्या का समाधान करें। तनातनी से देश का माहौल खराब हो रहा है, जिसका सीधा असर आम जनता पर है। सांप्रदायिकता देश की तरक्की में बाधक होगी।
-राजकुमार जायसवाल, व्यवसायी।

कोर्ट के निर्णय से होगा निर्माण तो ड्रामा क्यों
भाजपा ने पूर्ण बहुमत मिलने पर मंदिर निर्माण का वादा किया था। पूर्ण बहुमत मिलने के बाद भी बहानेबाजी उनकी मंशा को जाहिर कर रही है। मंदिर जब कोर्ट के निर्णय से ही बनना है तो इतना ड्रामा किस लिए हो रहा है। जनता सब समझ रही है।
-रितेश कुमार मिश्र, युवा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X
  • Downloads

Follow Us