मैदान से लेकर पहाड़ तक पर्यावरण संरक्षण की जगा रहे अलख

Gorakhpur Bureau Updated Sun, 04 Jun 2017 10:43 PM IST
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सवा दो लाख पौधे लगा चुके हैं विजेंद्र
देवरिया।
राघवनगर के रहने वाले विजेंद्र राय लवली मैदान से लेकर पहाड़ तक पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे हैं। अब तक वह सवा दो लाख से अधिक पौधे लगा चुके हैं। इस कार्य के लिए उन्हें सराहना पत्र मिल चुका है। सोमवार को वह डीएम, एसपी, एएसपी समेत सभी थानों में पौधरोपण कराएंगे। इसके संरक्षण की जिम्मेदारी संबंधित लोगों की होगी।
विजेंद्र राय लवली बताते हैं कि जब छोटे थे तो पुरानी पीढ़ी के लोग पौधा लगाते थे। उनसे सीख लेकर यह कार्य शुरू किया। प्रदेश के तमाम जिलों में पौधरोपण तो कराया ही है, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तरांचल में भी पौधरोपण किए हैं। पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में भी उन्होंने एक टीम तैयार की है। जो पौधा लगाकर उसका संरक्षण भी करते हैं। सदर विधायक जन्मेजय सिंह, कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही, पूर्व विधायक गजाला लारी, विधायक आशुतोष उपाध्याय बबलू और प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक ने उन्हें सराहना पत्र दिया है।
विद्यार्थी जीवन से शुरू किया पौधरोपण
भाटपाररानी। बनकटा ब्लॉक के अहिरौली बघेल गांव के रहने वाले ओमप्रकाश सिंह उत्तरांचल के देहरादून जिले के राजकीय इंटर कॉलेज होरावाला में भूगोल के प्रवक्ता हैं। विद्यार्थी जीवन से ही पेड़-पौधों के प्रति बेहद लगाव था। शिक्षक बनने के पूर्व गांव के युवा साथियों संग हजारों पौधे लगाए थे जो आज कीमती वृक्ष में तब्दील हो गए हैं। पहाड़ी क्षेत्र में सेवा का अवसर मिला तो उनका प्रकृति प्रेम परवान चढ़ा। विद्यालय में एनसीसी और एनएसएस के शिक्षक की अतिरिक्त जिम्मेदारी निभाते हुए विद्यार्थियों को पर्यावरण की सुरक्षा के लिये सदैव प्रेरित करते हैं। वह तंबाकू निषेध कार्यक्रम के संयोजक भी हैं। पुरखों से मिली प्रकृति प्रेम की प्रेरणा
उधर, राष्ट्रपति पुरस्कार से दो बार सम्मानित प्रधानाचार्य तेज प्रताप सिंह भी पर्यावरण सुरक्षा के लिए क्षेत्र में ख्यात हैं। उनके ज्येष्ठ पुत्र और कॉलेज प्रबंधक डॉ. भानु प्रताप बताते हैं कि बाबा स्वर्गीय राजनारायण सिंह प्रकृति प्रेमी थे। उन्हीं से यह संस्कार पिता जी को मिला। उन्होंने कॉलेज में हजारों पौधे लगवाए जो अब वृक्ष का रूप ले चुके हैं। जल संरक्षण के लिए कॉलेज के पिछले हिस्से में तालाब भी खुदवाया गया है, संस्था के आठ हजार विद्यार्थियों को प्रार्थना के समय प्रकृति के संरक्षण की शपथ दिलाई जाती है। प्रत्येक वर्ष संस्थापक जयंती के अवसर पर न केवल विद्यार्थियों बल्कि क्षेत्रीय किसानों को भी निशुल्क पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं। वह कहते हैं कि पुरखों से मिली अनमोल विरासत को और समृद्ध करने का प्रयास होगा ।

हरियाली बचाने को त्यागी कर रहे तपस्या
रुद्रपुर।
दिन-प्रतिदिन मिट रही खेती-बारी की परंपरा को रुद्रपुर के युवा किसान नया आयाम देने में जुटे हैं। वह दस साल से पर्यावरण के संरक्षण को जागरुकता फैला रहे हैं। अम्मा उर्फ अमवा गांव के रहने वाले युवा किसान हरेंद्र सिंह त्यागी की तपस्या रंग लाने लगी है। उनसे प्रेरणा लेकर गांव के युवा पौध रोपण को तरजीह देने लगे हैं।
जनसरोकारों को लेकर त्यागी समाज में बराबर सक्रिय रहते हैं। समाजवादी विचारधारा के पोषक युवा किसान को हरियाली का हरकारा कहा जाने लगा है। वह अपने आधे खेत में फलदार और छायादार पेड़ लगा कर पर्यावरण को संरक्षण दे रहे। त्यागी ने गांव में काले शीशम का जंगल लगाया है। वह बेशकीमती महोबनी के पौधे भी लगाए हैैं। इससे बंदूक की बट बनती है। उन्होंने कहा कि खेती बारी की मिटती परंपरा को बचाने के लिए दस साल से प्रयासरत हैं। उन्होंने घर पर फुलवारी तो खेत में बागवानी करनी शुरू की। पर्यावरण के दृष्टि से घर आंगन हराभरा होना चाहिए। पौधरोपण किसी भी दशा में लाभकारी होता है। फलदार वृक्षों से फल और छाया दोनों मिलते हैं। गांव का हर आदमी पेड़ लगाने में रुचि ले रहा है। पौध रोपण से पूरा गांव हराभरा लगने लगा है। गांव में पौध रोपण की परंपरा वर्षों पुरानी है। यहां सैकड़ों साल पुराने पीपल और बरगद के पेड़ हैं। गांव के युवकों में पर्यावरण की समझ आ गई है। वह पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

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