धार्मिक आस्था से जुड़ती जा रही बंदरों की मौत

Chitrakoot Updated Tue, 02 Oct 2012 12:00 PM IST
राजापुर(चित्रकूट)। तुलसी तीर्थ में मृत पाए गए बंदरों को बिना किसी जांच पड़ताल के नदी में फेंके जाने का मामला अब धार्मिक आस्था का विषय बनता जा रहा है। व्यापारियों और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने एक गाड़ी पर दो कुंतल पुआ, मिठाई, पूरी व फल राजापुर नगर, लालापुर, कर्वी और चित्रकूट में कामदगिरी परिक्रमा मार्ग पर बंदरों को खिलाए।
गौरतलब है कि 21 सितंबर को तुलसी तीर्थ राजापुर में यमुना पुल बाई-पास पर ग्यारह बंदर मृत पाए गए थे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बंदरों के शवों को बिना पोस्टमार्टम के ही यमुना नदी में प्रवाहित कर दिया था। इस संबंध में राजापुर पुलिस को लोगों का आक्रोश भी झेलना पड़ा था। राजापुर के कई धार्मिक व सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बंदरों की आत्मा की शांति के लिए सोमवार को हनुमान मदिर में सुंदरकांड का पाठ, हवन पूजन व प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। बजरंग सेवा समिति के महामंत्री संतोष कुमार सोनी के नेतृत्व में एक पिकअप वाहन पर दो कुंतल पुआ, चना, फल व मिठाइयां आदि लेकर भक्तों ने नगर, लालापुर, नांदी तौरा, कर्वी और कामदगिरी परिक्रमा मार्ग में बंदरों को खिलाने का कार्यक्रम किया। पिकअप पर भगत निषाद की कीर्तन मंडली भी साथ में थी। इसमें नीतू अग्रवाल, सुंदरलाल अग्रहरि, दीपू सैनी, सुभाष अग्रवाल, राजन सोनी, दशरथ प्रसाद गुप्ता, गिरजा शंकर गुप्ता, लखनलाल तिवारी, गया प्रसाद, कुबेर सिंह यादव, सुनील जायसवाल, संतोष जायसवाल, चून्नू रैकवार, पोची याज्ञिक शामिल रहे।

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