ई मस्टर रोल लागू होने से मनरेगा रफ्तार और सुस्त

Chitrakoot Updated Sun, 23 Sep 2012 12:00 PM IST
बारिश और गड़बड़ी पर अंकुश भी हो सकता है कारण-डीएम
चित्रकूट। मनरेगा में चल रहे गड़बड़झाले को रोकने के लिए लागू की गई ई-मस्टर रोल प्रणाली के बाद से मनरेगा के कामकाज की रफ्तार आश्चर्यजनक रूप से धीमी हो गई हैै। मजदूर काम की मांग करने के लिए मस्टररोल की फीडिंग कराने को जी का जंजाल समझ रहे हैं और मनरेगा के कामों पर नहीं पहुंच रहे। इससे मनरेगा के कामों में सुस्ती दिखाई दे रही है। हालांकि जिलाधिकारी केशवदास कहते हैं कि इस रफ्तार के धीमे होने की एक वजह सख्ती और बारिश को भी माना जाना चाहिए। चाहे जो भी हो पर छह माह बीत जाने के बाद भी मनरेगा में विकास के लिए दूसरी किस्त की बात कौन करे, पहली किस्त का भी पैसा पूरा खर्च नहीं किया जा सका है।
मनरेगा में ई-मस्टर रोल की शुरुआत अप्रैल माह में पूर्व जिलाधिकारी डा. आदर्श सिंह ने मनरेगा में व्याप्त अनियमितताओं को रोकने के लिए की थी। इसके तहत मजदूर द्वारा काम की मांग किए जाने पर मस्टररोल को भरकर कं प्यूटर में फीड कराना पड़ता है इसकी वजह से मनरेगा मजदूरों व ग्रामसभा प्रतिनिधियों में अरुचि पैदा हो गई है। यही कारण है कि इस वर्ष पहले के मुकाबले कम मजदूर काम में रुचि दिखा रहे हैं। जिले में कुल 118687 जॉब कार्डधारकों में से कुल कितने के 26742 परिवारों ने रोजगार की मांग की और कुल 26419 परिवार काम कर रहे हैं। रोजगार देने का आलम तो यह है कि 5832 परिवार ऐसे है 10 दिन से भी कम का रोजगार मिल सका है एवं 18452 परिवार ऐसे है जिन्हें मनरेगा से 15 दिन का भी रोजगार नहीं मिल सका। 2567 परिवार ही ऐसे है जिनको पचास दिन से अधिक का रोजगार मिला है। पिछले वर्ष इसी समय तक जिले में कुल 465 परिवारों को सौ दिन का रोजगार मिल चुका था जबकि इस वर्ष केवल 29 परिवार ही सौ दिन से अधिक का रोजगार पा सके हैं। कई ग्राम पंचायत अधिकारियों का कहना है कि वे बार बार मजदूरों से काम करने को कहते है लेकिन कोई मजदूर काम पर पहुंचता ही नहीं। जिले में मुख्य विकास अधिकारी का पद भी संभाल रहे जिलाधिकारी केशवदास ने बताया कि इसका एक कारण तो बारिश का लगातार होना हो सकता है उन्हंोने माना कि ई मस्टररोल से गड़बड़ियां समाप्त हो जाने से भी लोगों की र्क का रुकना भी एक कारण हो सकता है
बजट का आधा हिस्सा भी खर्च नहीं
अगर मनरेगा के बजट पर नजर डालें तो मनरेगा को जमीन पर क्रियान्वित करने वाले विकास ख्ंाड बात करें तो किसी भी ब्लाक में मनरेगा के बजट का आधा हिस्सा भी खर्च नहीं हो सका। सितंबर माह के अंतिम सप्ताह में कर्वी ब्लाक में मौजूद कुल 572.95 लाख रुपए में से केवल 257.87, मानिकपुर में 449.98 लाख रुपए में से 117 लाख रुपए, मऊ ब्लाक में 337.47 लाख रुपए में से 119.10 लाख रुपए, रामनगर ब्लाक में मौजूद 292.4 लाख रुपए में से 99.26 लाख रुपए और पहाड़ी ब्लाक में 218.49 लाख में से 96.31 लाख रुपए ही खर्च किया जा सका। उधर, कर्वी ब्लाक के अमानपुर गांव में बने कुल 435 जॉब कार्ड परिवारों में से 78 ने काम मांगा। 51 परिवार ही ऐसे हैं जिन्हें 15 दिन का काम मिला। गांव में दो काम पेंडिंग पड़े हैं व एक चल रहा है। साल भर में संपर्क मार्गों के कुल सत्रह काम हुए हैं। कुल 3.43 लाख रुपए ही खर्च हो सके हैं। जबकि खाते में लगभग पंाच लाख पड़े है। ऐसे उदाहरण हर जगह हैं।

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