न जांच न पड़ताल, बंदरों के शव नदी में फिंकवा दिए!

Chitrakoot Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
राजापुर (चित्रकूट)। यमुना पुल रोड बाईपास पर शुक्रवार की सुबह ग्यारह बंदरों के शव दिखाई देने से कस्बे में हड़कंप मच गया। लोगों ने इस बात की जानकारी पुलिस को दी तो एसओ राजापुर विवेक उपाध्याय ने लापरवाही बरतते हुए बंदरों के शवों को नदी में फिंकवा दिया और एक अचेत बंदर को थाने लाकर इलाज कराने लगे। लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि इन वन्य जीवों के मरने के बाद बिना पोस्टमार्टम आदि से बचने और तथ्यों को छुपाने के लिए ही उन्हें नदी में फेंकवा दिया गया है।
शुक्रवार को सुबह लगभग आठ बजे यमुना पुल बाईपास पर ग्यारह बंदर मरे पड़े देख हड़कंप मच गया। लोगों ने इस बात की सूचना राजापुर पुलिस को दी। नाम न छापने की शर्त पर लोगों ने बताया कि एसओ विवेक उपाध्याय और अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और बिना कोई कार्रवाई करे सभी बंदरों के शव तत्काल जमुना नदी में फिंकवा दिए। इसके अलावा एक अचेत बंदर को थाने में लाकर इलाज कराया।
पुलिस की इस लापरवाही से लोगों में आक्रोश है। इनका कहना है कि पुलिस को बंदरों का पोस्टमार्टम किए बगैर उन्हें नदी में कैसे फेंक दिया, यह बात पूरी तरह से संदेहास्पद है। इसमें या तो पुलिस ने तथ्यों में छेड़छाड़ कर दोषियों को बचाने की कवायद शुरु कर दी है अथवा इन शवों को लेकर जिला अस्पताल की दौड़-भाग से बचने के लिए तत्काल नदी में फेंककर अपने कर्तव्य से मुंह मोड़ लिया।
उधर, जब तक नगर पंचायत अध्यक्ष, धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि व पदाधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे तो बंदरों के शव को पुलिस ठिकाने लगा चुकी थी। सपा नेता सुंदर लाल अग्रहरि, राजेश सोनकर, उमेश कुमार सोनी व्यापार मंडल, राजकिशोर चौरसिया, नीतेश कुमार अग्रवाल, रवि जायसवाल, गौरी शंकर केशरवानी, राजू सोनी व दीपू सैनी ने राजापुर थाने में पहुंच कर बंदरों को मारने के लिए दोषी लोगों व साक्ष्य मिटाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया है। उनका कहना है कि अगर इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो लोग पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन करने पर मजबूर होगे।
सीओ-पंचायत अध्यक्ष के बयानों में विरोधाभास
इस मामले में जब सीओ राजापुर से पूछा गया तो उन्हाेंने बताया कि बंदरों का एसओ के साथ राजापुर नगर अध्यक्ष व प्रबुद्ध जनों की मौजूदगी में दाह संस्कार कराया गया जबकि नगर पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद वर्मा का कहना है कि सूचना पर जब वह घटना स्थल पर बंदरों के अंतिम संस्कार की सामग्री को लेकर पहुंचे तब तक इन शवों को नदी में फेंक दिया गया था। इस पर वह दाह संस्कार की सामग्री को जमुना नदी में डालकर चले आए। क्षेत्रीय वन प्रभागीय अधिकारी मूलचंद सिंह ने बताया कि एक साथ इतने बंदरों की मौत तो वाकई चिंता का विषय है। यह तो फूड प्वाइजनिंग का मामला लग रहा है। पुलिस को वनविभाग को सूचित कर उसका पोस्टमार्टम कराना चाहिए था। इसकी जानकारी अभी उन्हें हुई है, मामले में पता कर रहे हैं। अगर कोई दोषी पाया जाएगा तो कार्रवाई की जाएगी। उधर, इस संबंध में एसओ से बातचीत करने का प्रयास किया गया पर मोबाइल स्विच्ड आफ बताता रहा।

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