लगातार हो रही बारिश ने किसानों को किया बेदम

Chitrakoot Updated Tue, 11 Sep 2012 12:00 PM IST
... इस बार दाल बेचते नहीं खरीदते नजर आएंगे किसान
लगातार हो रही बारिश, खेत में सड़ रही दलहनी फसल
राजापुर (चित्रकूट)। लगातार बारिश से परेशान किसान की समस्या बढ़ती जा रही है। हालात यह है कि अगर कुछ दिन और बारिश जारी रही तो कुछ जिंसों के बीज तक निकलना मुश्किल है। किसानों का कहना है कि अगर इसी तरह बरसात होती रही तो बेचने की जगह वे लोग दाल खरीदते नजर आएंगे।
पूरे जिले में एक सप्ताह से रुक रुककर बारिश जारी है। पहले से परेशान किसान की इस बारिश ने दिक्कत और बढ़ा दी है। किसानों के कच्चे घर तो इस बारिश की भेंट चढ़ ही रहे हैं। साथ ही गांवों में संक्रामक बीमारियां भी पैर पसार चुकी हैं। उधर, अन्नदाता को अब अन्न के लिए भी भगवान की ओर ताकना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि पहले बारिश देर से होने की वजह से धान की बेहन (नर्सरी) पिछड़ गई और ज्यादातर किसान रोपाई नहीं कर पाए। बाजरा अरहर, मूंग, उर्द, तिली, ज्वार बोने का मौका भी लगातार बारिश से नहीं मिल पाया। आलम यह रहा कि कभी दिन में सूर्य भगवान ने निकलकर मौका भी दिया तो रात में इंद्र भगवान कुपित हो गए और बारिश हो गई। जहां बोई भी गई है वहां दलहनी फसल सड़ रही है। बीज की लागत तक निकलने की उम्मीद नहीं है। ज्यादातर किसानों के खेत खाली पड़े हैं। कर्वी से राजापुर मार्ग के दोनों तरफ खाली पड़े खेत किसानों की दुर्दशा की कहानी कह रहे हैं। राजापुर के तिरहार में ज्यादातर इलाका दोमट और मरवा मिट्टी का है। किसानों का कहना है कि इस मौसम में बलुई मिट्टी में तो बाजरा आदि की फसल उग भी सकती है पर दोमट और मरवा मिट्टी में बारिश पानी फेर देती है, जिससे हाल यही रहा तो किसान भी इस साल दाल खरीदते नजर आएंगे। विडंबना यह कि पिछले तीन साल से किसान सूखा झेल रहा था इस साल बारिश हुई तो वह भी जरूरत से ज्यादा। लोगों को सरकार से भी नाराजगी है। इनका कहना है कि सपा कर्जमाफी के वायदे के साथ सत्ता में आई थी पर अब तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। बेराउर के रमाकांत ने कहा कि लगातार बारिश से खरीफ से खाली खेत की अब रबी के लिए भी तैयारी नहीं हो पा रही है, जिससे अगली फसल में भी दिक्कत हो सकती है।

किसान क्रेडिट कार्ड को लेकर भी है नाराजगी
चिल्लीराकस के किसान सतेंद्र पांडे ने कहा कि सरकारी आंकड़ों में कर्मचारी सबकुछ दुरुस्त दिखाकर वाहवाही लूटते हैं और किसान को सुविधाओं से वंचित करा देते हैं। क्रेडिट कार्ड में प्रति किसान से दोनों फसलों में बीमा की धनराशि कर्ज में जोड़ दी जाती है लेकिन जबतक नुकसान की कर्मचारी पुष्टि नहीं करते तब तक कोई सुनवाई नहीं होती। हरिश्चंद्र पांडे ने तो किसान क्रेडिट कार्ड में बीमा की अनिवार्यता समाप्त करने को कहा। इनका कहना है कि अगर ऐसा नहीं होता तो किसान द्वारा नुकसान बताए जाने पर जांच कराकर बीमा की धनराशि भुगतान कराए जाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बैंकों में केसीसी के नाम पर कमीशन लिए बिना काम ही नहीं होता।


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