उपदेश नहीं, आचरण देख बच्चे होते हैं संस्कारवान

Chitrakoot Updated Tue, 28 Aug 2012 12:00 PM IST
सोमवार को झालरिया पीठाधीश्वर घनश्यामाचार्य जी महाराज ने भक्तों से सामाजिकता के पतन पर कटाक्ष कर कहा कि संस्कारों का हनन हो चुका है। सामाजिक संस्कारों की आज के समय में इसकी महती आवश्यकता है। कहा कि संस्कार बच्चों में माता पिता को देखकर आते हैं उनके उपदेशों का बच्चों का कोई असर नही होता जब तक वह अपने बड़ों को वैसा आचरण करते नही देखते। उन्होंने बताया कि संस्कारों का बीजारोपण बचपन में ही हो सकता है। बच्चा एक कच्ची मिट्टी के समान होता है उसी समय उनमें संस्कार डाले जा सकते हैं। इसीलिए उन्होंने बच्चों को भी इस तरह के आयोजनों में लाने की बात भी कही। गुरु जी ने कन्या भ्रूण हत्या को रावण के आचरण की संज्ञा देते हुए कहा कि उससे बड़ा कोई पाप ही नहीं है।

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