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दिक्कतों पर भारी पड़ी आस्था

Chitrakoot Updated Fri, 20 Jul 2012 12:00 PM IST
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श्रावणी अमावस्या के दूसरे दिन भी नहीं थमा श्रद्धालुओं का सैलाब
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चित्रकूट। श्रावणी अमावस्या के दिन गुरुवार को लगभग दो लाख श्रद्धालुओं ने चित्रकूट के रामघाट पहुंचकर मंदाकिनी में स्नान किया। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने मत्यगयेंद्रनाथ को मंदाकिनी का पवित्र जल चढ़ाया। श्रद्धालुओं ने कामदगिरी की परिक्रमा लगाई और कामतानाथ मुखारबिंद के दर्शन किए। बांदा, हमीरपुर, महोबा, कानपुर, झांसी, सतना, पन्ना, रीवा आदि जिलों से बुधवार और गुुरुवार को लोगों का आना जारी रहा।
गुरुवार को श्रावणी अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालुओं में मंदाकिनी में स्नान कर मत्तगयेंद्रनाथ को जल चढ़ाने के बाद कामतानाथ की परिक्र मा की। मत्यगयेंद्र नाथ पूजा समिति के पंडित प्रदीप तिवारी ने बताया कि आज स्नान दान की श्रावणी अमावस्या है। इस अवसर पर लगभग दो लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया है। ़बताया कि भगवान शंकर का महीना होने से इस महीने मेें पड़ने वाली अमावस्या का महत्व खुद ब खुद बढ़ जाता है। अतर्रा के नाई गांव से आए छोटा ने बताया कि वह कल से ही आए हैं। कल उन्हाेंने कामतानाथ की परिक्रमा की और आज रामघाट पहुंचकर मत्यगयेंद्रनाथ को जलाभिषेक किया। रामपुर के मुन्नू पटेल ने भी कामदगिरी की परिक्रमा कर मत्यगयेंद्रनाथ का जलाभिषेक किया। बलरामपुर के मूरत यादव, राम लाल, पप्पू, मुन्ना आदि श्रद्धालुओं ने दो दिनों से मतगंजन स्वामी को जल चढ़ा कामतानाथ की परिक्रमा की। पन्ना के भोला सिंह, खजुराहो के अशोक मधूलिका व रामबाबू ने परिवार के साथ मतगंजन स्वामी का जलाभिषेक किया। भरतकूप प्रतिनिधि के अनुसार भरतकूप मंदिर में लाखों की तादात में पैदल श्रद्धालुओं ने भरतकूप में स्नान किया। इसके बाद पैदल ही भरतकूप से खोही पहुंचे। लोगों का कहना है कि भरतकूप में जिला प्रशासन के द्वारा कोई व्यवस्था नहीं की जाती है और यहां से सीधे चित्रकूट पहुंचने वालों की संख्या जिला प्रशासन के अनुमान से अधिक हो जाती है जिससे उनके इंतजाम बौने साबित होते हैं।


प्रभारी जिलाधिकारी के निर्देश हवा-हवाई रहे
मेले में आए श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन के इंतजाम बौने साबित हुए। अमावस्या मेले को देखते हुए प्रभारी जिलाधिकारी ने बैठक कर अधिकारियों को मेलार्थियों के लिए चुस्त दुरुस्त व्यवस्था के निर्देश दिए थे। पर ये निर्देश थोथे साबित हुए। टेंपों चालकों ने मनमाना किराया वसूला और जमकर ओवर लोडिंग की। एडीएम ने टेंपो संचालकों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए एआरटीओे एके सोनकर को निर्देश दिया था कि वह तीन टीमें बनाकर टेंपो चालकों की अराजकता पर ध्यान रखेंगे लेकिन मेले के दिन एआरटीओ की टीमों का पता नहीं चला। टेंपो की अराजकता से ही एक सोलह वर्षीय किशोर की मौत हो गई।
ट्रेनों की छतों में बैठे लोग
रेलवे स्टेशन के बाहर बने मेला टिकट घर सूना ही पड़ा रहा।ट्रेनों का तो हाल यह रहा कि दिन भर बांदा की ओर जाने वाली ट्रेनों में लोग छतों पर भी यात्रा करते हुए देखे गए। हालत तो इतनी खराब हो गई कि लोग ट्रेन के इंजन पर चढ़ गए जिससे डाइवर को दिक्कत होने लगी। इस पर ड्राइवर ने जीआरपी को बुलाया इसके बाद जीआरपी ने इंजन पर सवार लोगों को नीचे उतारा इसके बाद ही किसी तरह ट्रेेनें रवाना की गईं।

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