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ढाई किमी में बना दिए छह चेकडैम

Chitrakoot Updated Fri, 20 Jul 2012 12:00 PM IST
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जारी है चेकडैमों की शिकायतें, सीएम को भेजा गया पत्र
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मऊ (चित्रकूट)। जिले में चेकडैमों को लेकर अनियमितताएं अब लगातार सामने आ रही है। मऊ के खंडेहा गांव में बमुश्किल दो से ढाई किमी के अंदर छह चेकडैम बना दिए गए हैं। वह भी ऐसे नाले में जिसमें बरसात के दिनों में भी कभी पानी नहीं रहता है। इस संबंध में खंडेहा गांव के प्रेमकिशोर पुत्र हनुमान दास ने उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से चेकडैम निर्माण की अनुपयोगी योजना की जांच की मांग की है।
मऊ व मानिकपुर क्षेत्र में 2668.43 लाख की लागत से अट्ठावन चेकडैम राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल आपूर्ति कार्यक्रम के तहत बनवाए जा रहे हैं। प्रेम किशोर निवासी खंडेहा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बताया कि जिले के अधिकांश चेकडैम सूखे नालों पर बनाए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि सूखे नालों से किस तरह से पेयजल की आपूर्ति की जाएगी। उनका आरोप है कि 2011 में बिना कार्ययोजना की स्वीकृ ति के फर्जी योजना बनाकर धन की बंदर बांट की गई है। यह काम इलाहाबाद के परियोजना प्रबंधक सीएंडडीएस उत्तर प्रदेश जल निगम के एडी/ 8 एकाकी कुंज म्योर रोड इलाहाबाद से कराया जा रहा है। इन चेकडैमों में 20 लाख से लेकर अधिकतम 94.14 लाख तक के बढे़ स्टीमेट से बनवाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में शिकायत की गई है कि इतने भारी भरकम बजट के साथ बनने वाले वाले इन चेकडैमों को बिना किसी लोहे की सरिया के पत्थर की दोनों दीवार बनाकर बीच में कम कीमत के छोटे-छोटे पत्थर डालकर सीमेंट बालू की घटिया घोलाई करके निर्माण किया जा रहा है। उन्होनें पत्र में अपने गांव में बने चेकडैमों की उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने जनसूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी तब यह खुलासा हुआ। बताया कि खंडेहा गांव में जनसूचना से मिली जानकारी के अनुसार दो से छाई किमी के बीच में छह चेकडैम बनवाए जा रहे हैं। जबकि मुख्य विकास अधिकारी एके सिंह ने 18 जुलाई 2011 को पत्रांक 659 के अनुसार डेढ़ किमी के भीतर दूसरा चेकडैम न बनाने का आदेश दिया था। जन सूचना से मिली जानकारी के अनुसार चेकडैमों का निर्माण पीसीआर के माध्यम से कराया जा रहा है, जबकि निविदा के आधार पर ठेका होना चाहिए था। खंडेहा गांव के ग्रामीण कैलाश चंद , सुशील चंद्र, मिठाईलाल, कल्लू प्रसाद, श्रीराम प्रकाश, शिवशंकर, मोतीलाल ने बताया कि खंडेहा गांव में सौ-सौ मीटर की दूरी पर तीन चेकडैम बने हैं। इसके अलावा सेमरिहा नाला पर भी तीन चेकडैम एक दूसरे से सौ-सौ मीटर की दूरी पर बने हुए हैं। ग्रामीण कहते हैं कि इस नाले पर तो कभी पानी का बहाव ही नहीं होता तो इस नाले पर चेकडैम से किसे लाभ होगा या किस तरह से इससे सिंचाई होगी। इन्होने आरोप लगाया कि सरकारी धन का दुरुपयोग करने के लिए बहुत ही छोटे नाले पर चेकडैम बनवाया गया और इसे दिखाने के लिए चेकडैम के पास जेसीबी से खुदाई कराकर चौड़ा बना दिया गया है जबकि दूसरी जगह पर उस नाले का पता ही नहीं चल रहा है। उन्होने मुख्यमंत्री से चेकडैम की जांच की मांग की है।

क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में सीएंडडीएस के अवर अभियंता एके श्रीवास्तव ने बताया कि उनके चेकडैम छह हंै जो तीन नालों पर बने हुए हैं। तीनाें नाले समानांतर होने से उन पर बनाए गए है। बताया कि अउझर नाले पर दो चेकडैैम है जिनके बीच में एक किमी दूरी पर व सेमरिहा नाले में दो चेकडैम डेढ़ किमी की दूरी पर हैं। उन्होने कोई भी चेकडैम सौ मीटर की दूरी पर नहीं है। उनका कहना है कि जब बारिश में पानी चेकडैम में रुकेगा तो जमीन में रिचार्ज होगा। उन्होंने बताया कि बजट अधिक होने की बात पर जिलाधिकारी की शिकायत पर केंद्रीय एजेंसी जांच कर रही है। वह लोग खुद रेट के बारे में चिंतित है कि वन विभाग और लघुसिंचाई विभाग का बजट कैसे कम है।


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