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जिले के बेसिक स्कूलों में जरूरत से आधे शिक्षक

Chitrakoot Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
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नए सत्र में नए अधिकारी और चुनौतियां हैं पुरानी
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चित्रकूट। नया शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है। जरूरत से लगभग आधे शिक्षक परिषदीय स्कूलों में हैं। पहले से ही शिक्षकों की कमी और अन्य बड़ी समस्याओं से जूझ रहे विभाग के सामने इस साल भी यही चुनौतियां सामने हैं। ऐसे में बेसिक शिक्षा अधिकारी का तबादला भी हो गया। अब देखना यह है कि इन चुनौतियों से नए बेसिक शिक्षाधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह कैसे पार पाएंगे।
जिले में कु ल 891 प्राथमिक व 459 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में क्रमश: 1490 व 777 अध्यापक तैनात थे। इनमें से प्राथमिक विद्यालय के 27 व पूर्व माध्यमिक के 47 अध्यापक जून 2012 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। पिछले वर्ष अतरौली प्राथमिक विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक की हत्या हो गई थी। इस वर्ष एक महिला अध्यापक का स्थानांतरण मानिकपुर के छोटी मडै़यन से झांसी के लिए हो गया। यानि अब केवल प्राथमिक विद्यालय में 1461 व पूर्व माध्यमिक विद्यालय में केवल 730 अध्यापक तैनात हैं। इसके अलावा जिले में कुल 1450 शिक्षामित्र हैं इनमें से 450 को विशिष्ट बीटीसी की ट्रेनिंग कराकर उन्हे अध्यापक के रुप में नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। बेसिक शिक्षा कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस समय जिले में लगभग एक हजार छह सौ अध्यापकों की कमी है। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि शासन स्तर पर होने वाली बैठकों में इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे।

प्राथमिक विद्यालयों में दूसरी समस्या अध्यापकों की विद्यालय के प्रति जिम्मेदारियों से की जा रही लापरवाही है। आलम तो यह है कि कक्षा पांच उत्तीर्ण ज्यादातर छात्रों को हिंदी व अंग्रेजी की वर्णमाला के सभी अक्षर तक ठीक से लिखना नहीं आता है। इसके अलावा अध्यापकों में समय से विद्यालय पहुंचने की आदत खत्म सी हो गई है।
इससे छात्रों के भविष्य पर बहुत खराब असर पड़ रहा है। इसके अलावा अध्यापकों द्वारा बच्चों को बनने वाले मिड डे मील, विद्यालय भवनों के निर्माण में अनियमितताओं को लेकर भी अक्सर शिकायतें मिलती रहती हैं।
नए निजाम बोले, जल्द बदली नजर आएंगी स्थितियां
बेसिक शिक्षाधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह ने समस्याओं को स्वीकार कर दावा किया कि कुछ दिन में स्थितियां बदली बदली नजर आएंगी। उन्होंने आते ही सहायक बेसिक शिक्षाधिकारियों को निर्देश दे दिया कि देर से एवं विद्यालय न आने वाले अध्यापकों को बर्दाश्त नही किया जाएगा। पहले तो उन्हें समझाया जाएगा अगर फिर भी अध्यापक नहीं सुधरे तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद को साबित किया है जिले के सबसे पिछड़े विद्यालय राजकीय इंटर कालेज घुरेटन में शत प्रतिशत परीक्षाफल व इनमें से साठ फीसदी प्रथम श्रेणी इसका पुख्ता प्रमाण है। 1997 बैच के पीईएस महेंद्र प्रताप सिंह 1999 उत्तराखंड में केलाखेड़ा में पहली तैनाती की गई थी। उधम सिंह नगर उत्तराखंड में वह खंड शिक्षाधिकारी व जिला शिक्षाधिकारी के रुप में तैनात रहे हैं। सन् 2009 में यूपी व उत्तराखंड की सरकारों में म्यूचुअल के तहत उनका स्थानांतरण चित्रकूट हुआ। चित्रकूट जनपद में भी उन्हें प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक का दायित्व निभाने का अवसर मिला।

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