बारह घंटे तक त्रिशंकु बना रहा गोली से घायल

Chitrakoot Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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थाने से अस्पताल और पीएचसी से जिला अस्पताल दौड़ाते रहे जिम्मेदार
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सरैंया (चित्रकूट)। संवेदनहीनता की हद है। बदमाशों की गोली से घायल एक संविदाकर्मी बारह घंटे तक अस्पताल से थाने और थाने से अस्पताल के बीच फुटबाल बना रहा और जिम्मेदारों का दिल नहीं पसीजा। उसे भर्ती नहीं किया गया। बाद में लोगों की पहल व दबाव के बाद जिला अस्पताल में इलाज शुरू हुआ... और अब पुलिस और चिकित्सा विभाग के नुमाइंदे अपनी बात को जायज ठहराने के लिए अपनी-अपनी दलील दे रहे हैं।
बोड़ी पोखरी तालाब के पावर हाउस में तैनात संविदाकर्मी रमाशंकर पाठक (35) पुत्र चंद्रभान पाठक निवासी देउधां शनिवार रात लगभग नौ बजे रामनगर से तीन किमी दूर एक पोल से जंपर काटने जा रहा था, जिससे अस्पताल की सप्लाई न बंद हो। रमाशंकर के साथ रामाकोल टावर का कर्मचारी सोनू भी था। सोनू बाइक चला रहा था। रमाशंकर ने बताया कि जब वे लोग जंपर से लगभग 10 मीटर दूर थे तभी तमंचा व फरसा लिए दो बदमाशों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। सोनू ने बाइक तेज भगाई तो तमंचा लिए युवक ने फायर कर दिया। गोली पीछे बैठे रमाशंकर को लगी। सोनू ने फोन से यह सूचना तुरंत रमाशंकर के परिजनों को दी। परिजन वहां पहुंचे और उसे लेकर रामनगर पीएचसी आए। परिजनों ने बताया कि वहां पर ड्यूटी पर तैनात डाक्टर नदारत थे। वहां मौजूद दो आशाओं ने डिलीवरी के लिए रखा कपड़ा घाव के ऊपर बांध दिया। बाद में पहुंचे डाक्टर नरेंद्र कुमार ने घाव देखने की जहमत नहीं समझी और उसके ऊपर से पट्टी बांधकर जिला अस्पताल के लिए रिफर कर दिया। उधर, जिला अस्पताल में इमरजेंसी पर डाक्टर परविंदर सिंह मौजूद थे। परिजनों का आरोप है कि डाक्टर ने सिर्फ इसलिए उसे हाथ लगाने से मना कर दिया कि उसके पास कागजी कार्रवाई पूरी नहीं थी। परेशानहाल परिजन भागे-भागे फिर रामनगर थाने गए और किसी तरह से एफआईआर का कागज लेकर फिर रामनगर गए। तब तक रात के तीन बज चुके थे। वहां डाक्टर नरेंद्र कुरैसिया ने फार्मेसिस्ट मौके पर न होने की बात कही और फिर मरीज को जिला अस्पताल भेज दिया। सुबह लगभग दस बजे तक चिकित्सक प्रमोद कुमार उसे मेडिकोलीगल के लिए पुन: रामनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजने की बात कर रहे थे। इस पर तीमारदारों ने सीएमओ डा. आरडी राम से बात की तो उनके और अन्य लोगों के दबाव पर भर्ती किया गया और इलाज शुरू किया गया।
... और यह है जिम्मेदारों की दलीलें
एसओ रैपुरा नंदलाल का कहना था कि बिजलीकर्मी रात लगभग एक बजे आया था। उसी समय एफआईआर दर्ज कराई गई। उधर, रामनगर के चिकित्सा अधीक्षक नरेंद्र कुरैशिया ने बताया कि मरीज पहली बार थाने से होकर नहीं आया था और तेज खून निकल रहा था, इस वजह से घाव को खोला नहीं और ऊपर से पट्टी कर दी। बताया कि उन्होंने उसका प्राथमिक इलाज पहले ही कर दिया था। उन्होंने कहा कि पैर में जो पट्टी बंधी थी वह आशा बहुओं ने नहीं, बल्कि घरवालों ने बांधी थी। साथ ही मरीज के परिजनों से थाने होकर जिला अस्पताल जाने को कहा था। जिला अस्पताल के चिकित्सक डा. परमिंदर सिंह ने बताया कि घाव को प्रथमदृष्ट्या देख लिखापढ़ी को दोबारा पीएचसी रामनगर भेजा था। थाना इंचार्ज रैपुरा ने पीएचसी रामनगर लिखा था। बताया मरीज का प्राथमिक ट्रीटमेंट हो चुका था और सर्जिकल ट्रीटमेंट के लिए रात में एक बजे कोई डाक्टर उपलब्ध नहीं था। इस लिए मरीज को रामनगर के लिए भेजा। इस मामले की जानकारी लेने को जब सीएमएस डा. देशराज और सीएमओ डा. आरडी राम को फोन किया तो कहा वह बाहर हैं और फोन सुनाई नहीं दे रहा है।
दोनों जगहों पर ज्यादती हुई- एसडीएम
पूरे प्रकरण में एसडीएम मऊ वीके गुप्ता का मानना है कि घायल मरीज के साथ दोनों जगहों पर ज्यादती हुई। उन्होंने कहा कि वहां फार्मासिस्ट न होने की बात कहकर पीएचसी से उसको जिला अस्पताल भेजा गया तो जिला अस्पताल के डाक्टर ने भी गंभीरता से मामले को नहीं लिया। उन्होंने बताया कि वह इस मामले पर रामनगर अस्पताल से रिपोर्ट मांग रहे हैं।

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