घर में कमला आई तो मां-बाप को सामाजिक बहिष्कार का खतरा

Chitrakoot Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
मऊ (चित्रकूट)। कमला कुशवाहा को उसके मां-बाप घर लाने को तैयार नहीं हैं। उन्हें डर है कि कमला को लाने पर बिरादरी उनका सामाजिक बहिष्कार कर देगी। गांव में हुक्का-पानी तक बंद हो जाएगा। इसी वजह से 24 जून को बड़े भाई की शादी में कमला को बुलाया तक नहीं गया। इलाहाबाद में प्रसव के बाद पुलिस के कहने पर भी मां बेटी को घर लाने के बजाय उसे नारी निकेतन भेज देने को कहती हैं। कमला इस समय नवजात के साथ इलाहाबाद के नारी निकेतन में है।
कमला कुशवाहा वही लड़की है, जिसने बसपा सरकार में कद्दावर मंत्री रहे दद्दू प्रसाद और उनके कथित पीए अंगद के खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगाया था। नौ जुलाई को इलाहाबाद में हुए प्रसव में भी उसने बच्चे का पिता दद्दू प्रसाद के होने की बात कहकर उनके डीएनए टेस्ट की मांग की है। मां-बाप ने हालांकि कमला की लड़ाई में पूरा साथ देने की बात कही है, लेकिन समाज के कट्टर नियम-कायदों के आगे उन्होंने भी हार मान ली है।
शुक्रवार को अमर उजाला प्रतिनिधि ने बरगढ़ के कोलमजरा गांव का दौरा किया तो समाज और बिरादरी की कड़वी सच्चाई उजागर हुई। रेलवे स्टेशन और बरगढ़ के बीच बसे इस अनजान से कोलबहुल मजरे की कमला के कारण अब बहुत पहचान है।
आम तौर पर बेटे के जन्म पर ननिहाल में खुशियों का आलम होता है पर कोलमजरा में रिटायर्ड रेलकर्मी अयोध्या प्रसाद के घर पर सन्नाटा पसरा है। नौकरी के समय में रेलवे मजदूर संघ के असिस्टेंट सेकेट्री रहे अयोध्या प्रसाद अपनी बिरादरी के खिलाफ खड़े होकर खुलकर बिटिया के साथ आने को तैयार नहीं। उनकी पत्नी पार्वती ने बताया कि कमला 15 जनवरी से शंकरगढ़ में रह रही है और उनके परिवार का उससे कोई वास्ता नहीं। मां-बाप इतना जरूर कहते हैं कि कमला की न्याय की लड़ाई में वह अंतिम दम तक साथ देंगे। पर वह घर में नहीं रह सकेगी। पार्वती ने कहा कि वे लोग अपनी एक बिटिया के लिए बाकी पांच बच्चों के भविष्य को दांव पर नहीं लगा सकते। अयोध्या ने बताया कि 24 जून को उनके बड़े बेटे बबलू की शादी में भी बिरादरी के कम लोग ही जुटे। ऐसे में अगर कमला साथ रहने लगेगी तो शायद बिरादरी हुक्का-पानी ही बंद कर दे। घर में मौजूद अन्य परिजनों का भी कहना था कि वे लोग कमला के साथ सहानुभूति तो रखते हैं पर यहां रहे यह मंजूर नहीं।
विडंबना यह कि मां पार्वती ने बताया कि उनके यहां उस मासूम के पैदा होने को लेकर खुशी या गम की कोई भावना नहीं है। पार्वती ने बताया कि वह अपने पति और बेटे बबलू के साथ कमला को देखने इलाहाबाद गई थी। वहां पुलिसवालों ने उससे कहा था कि कमला को घर ले जाएं, पर उसकी हिम्मत नहीं हुई। यही वजह है कि बाद में कमला को नारी निकेतन भेज दिया गया।

दद्दू का फोन आता था
अयोध्या प्रसाद इस बात को स्वीकार करते हैं कि अंगद उनके घर आता था। वह बताते हैं हालांकि मंत्रीजी कभी घर नहीं आए। उनका फोन जरूर कमला के फोन पर आता था। जब फोन आता था तो कमला कहती थी-मंत्रीजी का फोन है। अयोध्या ने बताया कि अगर दद्दू प्रसाद कहते हैं कि कमला से उनका वास्ता नहीं तो फिर फोन क्यों आता था, यह जांच का विषय होना चाहिए। कहा कि कमला कई बार मंत्रीजी के लखनऊ स्थित आवास पर भी गई थी।

अब इलाहाबाद के अधिकारियों से आस
कमला की मां ने कहा कि तत्कालीन कोतवाल मनोज कुमार कौशिक उसके घर आकर कई बार धमकी दे गए थे कि मंत्रीजी के खिलाफ आरोप वापस ले लो, वर्ना पूरे परिवार को जेल जाना पड़ेगा। उसने कहा कि उनको कर्वी के अधिकारियों से तो न्याय नहीं मिला, लेकिन अब इलाहाबाद के अधिकारियों से न्याय की आस है।

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