गायत्री शक्तिपीठ में मनी गायत्री जयंती

Chitrakoot Updated Sat, 02 Jun 2012 12:00 PM IST
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चित्रकूट। गायत्री शक्तिपीठ में गंगा दशहरे पर अखंड गायत्री मंत्र का जप व पूर्णाहुति के साथ गंगा दशहरा का पर्व मनाया गया।
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शक्तिपीठ में पूजन का कर्मकांड शक्तिपीठ के व्यवस्थापक डा. रामनारायण त्रिपाठी ने संपन्न कराया। उन्हाेंने गायत्री मंत्र और गंगा दशहरा का माहात्म्य बताया। उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र वेदों का सार है। धर्म ग्रंथों का विस्तार वेद से ही हुआ है। बताया कि संपूर्ण ग्रंथों का सार गायत्री मंत्र के प्रथम चरण ऊं भूर्भुव: स्व: में ही समाहित है, जिसका मतलब है परमात्मा पृथ्वी, आकाश, और पाताल लोक में अथवा सर्व व्याप्त है। गायत्री मंत्र पारस, कल्पवृक्ष, कामधेनु के समान साधक का कल्याण करने वाली सर्व समर्थ शक्ति है। इसकी साधना और कृपा से मनुष्य मुसूर शक्ति अर्थात पृथ्वी का देवता बन जाता है। उन्होंने बताया कि गंगा दशहरा के दिन ही सगर पुत्रों को तारने के लिए भगीरथ ने तपस्या कर इसी दिन गंगा को जमीन पर उतारा था। रामनरायन ने बताया कि इसी दिन उनकी संस्था के संस्थापक आचार्य पं श्रीराम शर्मा ने महा प्रयाण किया गया। उनके निमित्त भी आज के दिन विशेष आहुतियां दी गई थीं। कार्यक्रम को सफलता पूर्वक संपन्न कराने में महिला मंडल की संयोजिका सुनीता श्रीवास्तव ने भी योगदान दिया। सत्यनारायण अग्रवाल, तारा देवी, सुमन गोस्वामी, अरविंद सिंह, रामशरण कुशवाहा भी उपस्थिति रहे।
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