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आस्था के आगे हारी चिलचिलाती गर्मी

Chitrakoot Updated Mon, 21 May 2012 12:00 PM IST
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चित्रकूट। भगवान राम की कर्मभूमि पर जेठ माह की बरगदाही अमावस्या पर आस्थावानों का हुजूम उमड़ा। पूरे दिन लगभग डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में डुबकी लगाई। आस्था के आगे चिलचिलाती धूप भी हार गई। उधर, महिलाओं ने सुहाग की दीर्घायु के लिए बरगद की पूजा और परिक्रमा की। जगह-जगह पर समाजसेवियों ने शरबत और शिकंजी पिलाकर श्रद्धालुओं की सेवा कर पुण्य कमाया।
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अमावस्या मेले में शनिवार से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, यह क्रम रविवार को लगभग चार बजे तक चलता रहा। बरगदहिया अमावस्या के दिन सावित्री वट व्रत का प्रावधान है। महिलाओं ने पति की दीर्घायु की कामना से व्रत रखा और तरह-तरह के पकवान बनाकर बरगद के पेड़ की पूजा की। मतगंजन स्वामी मंदिर के पुजारी पंडित बृजनंदन जी ने बताया कि बरगदही अमावस्या को वट सावित्री व्रत के रूप में जाना जाता है। लोक कथा है कि सती सावित्री का विवाह अल्पायु सत्यवान के साथ हो गया। जब देवर्षि नारद से सावित्री को इसकी जानकारी हुई तो उसने कहा कि अब तो विवाह हो गया है, वही उसके पति रहेंगे। विवाह के बाद से सावित्री रोज वट वृक्ष की पूजा करती थी। जब साल भर बीत गया तो सत्यवान की तबीयत बिगड़ने लगी। यमदूत उन्हें लेने आए तो सावित्री की पूजा और नित्य नियम से प्रभावित होकर उसे नहीं ले जाए पाए। यमदेव को सावित्री की तपस्या से प्रभावित सत्यवान को दीर्घायु होने का वरदान देना पड़ा, तभी से वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा होने लगी। उन्होंने बताया कि वट वृक्ष स्वयं दीर्घायु होता है, इसीलिए सुहागिन पति की दीर्घायु की कामना से वट वृक्ष की पूजा करती हैं।
श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण रामघाट से लेकर रेलवे स्टेशन तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। श्रद्धालु जहां कही पेड़ की छाया देखते, वहीं खडे़ हो जाते। पानी के लिए परेशान भी दिखे। मंदाकिनी स्नान और कामतानाथ की परिक्रमा के बाद श्रद्धालु जब रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो पूरे प्लेटफार्म पैर रखने की जगह तक नहीं बची थी। टिकटघर के चारों काउंटरों पर लंबी लाइन लगी रही। ट्रेन के डिब्बे में जगह न मिलने पर ट्रेन की छतों पर बैठकर श्रद्धालुओं ने यात्रा की।
बजरिया महोबा के उत्तम, गोलू और उनके साथियों ने स्नान के बाद लौटते समय बताया कि वे तीन साल के बाद इस मौके आए हैं। इन लोगों ने बताया कि गर्मी से बेहाल हो गए हैं लेकिन भगवान की श्रद्धा है जो उन्हें यहा तक ले आई। मरका के काशी प्रसाद अपने पूरे गांव के साथ मंदाकिनी स्नान के लिए आए हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी में तो काफी परेशानी हो रही है।

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