दस साल बाद भी नहीं हुई चक पैमाइश

Chitrakoot Updated Fri, 18 May 2012 12:00 PM IST
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मऊ (चित्रकूट)। ग्राम पंचायत बरहा कोटरा के मजरे घुरेहटा के लोगों ने एसडीएम से शिकायत की है कि उनके गांव में चकबंदी के बाद अभी तक चक पैमाइश नहीं की गई है। इस वजह से रास्ते का विवाद नहीं सुलझ रहा है। इससे कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है। गांव वालों ने तहसील दिवस में भी इस आशय का पत्र दिया था, किंतु कोई सुनवाई नहीं हुई।
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ग्रामीणों का कहना था कि उनके गांव में लगभग दस साल पहले चकबंदी प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। सारे अभिलेख भी तहसील में जमा हो गए हैं। इसके बाद भी चक पैमाइश (कब्जा परिवर्तन) नहीं की गई है। आरोप लगाया कि कर्मचारियों ने बिना चक पैमाइश के ही सारे अभिलेख जमा कर दिए। कई बार ग्रामीणों ने इसकी शिकायत की, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। इनका कहना है कि चक पैमाइश न होने से न तो चकरोड का पता है और न ही रास्ते का। यदि चक पैमाइश जल्द नहीं कराई गई तो गांव में विवाद गंभीर रूप ले सकता है। ग्रामीणों ने एसडीएम से अभिलेखों को चकबंदी कार्यालय में वापस कराकर नियमानुसार कार्रवाई के लिए चकबंदी और तहसील कर्मचारियों को निर्देशित करने का अनुरोध किया है।
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