कैदी सशर्त मोबाइल से परिजनों से बात कर सकेंगे

Chitrakoot Updated Wed, 16 May 2012 12:00 PM IST
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चित्रकूट। कारागार और खाद्य एवं रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया ने कहा है कि अब कैदी कुछ शर्तों के साथ जेलों से अपने परिजनों से मोबाइल पर सप्ताह में दो बार बात कर सकेंगे। पहले जेलों में कैदियों से उनके परिजनों की भेंट दो बार हो पाती थी पर अब यह चार बार हो सकेगी।
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निजी दौरे पर चित्रकूट आए राजा भइया ने मीडिया से बातचीत में अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं और सरकार बनने से लेकर अब तक की उपलब्धियों का ब्योरा दिया। उन्होंने कहा कि पहले जेलों में कैदियों से उनके परिजनों की भेंट दो बार हो पाती थी पर अब यह चार बार हो सकेगी। तिहाड़, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र की तर्ज पर कैदी जेल से अपने परिजनों से मोबाइल पर बात कर सकेंगे। इसके लिए इनको जेल प्रशासन को अपने परिजनों के कोई दो नंबर मुहैया कराने पड़ेंगे। इसके अलावा सारी बातचीत रिकार्ड भी की जाएगी। बताया कि पूरे प्रदेश में अस्सी हजार बंदी हैं। नौ जेलें अभी निर्माणाधीन हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में लगभग ढाई हजार बंदियों का विभिन्न रोगों में उपचार कराया गया है और रोगियों के अच्छे उपचार के लिए वह प्रयासरत हैं।
खाद्य रसद विभाग में गंभीर कमियों की बात स्वीकारते हुए राजा भइया ने कहा कि सीधे जनता से जुड़े विभाग के होने की वजह से ऐसा है पर अभी सरकार बने कुछ ही दिन हुए हैं। वह एक साल में इस महकमे की कमियों को दूर कर देंगे।
एक सवाल पर कहा कि बसपा सरकार घोटालो ंकी सरकार थी और इसने हाथियों और पार्कों में गरीबों की भलाई के लिए लगाए जा सकने वाले धन का प्रयोग किया। 86 करोड़ केवल मायावती के बंगले की रंगाई पुताई और मरम्मत में खर्च कर दिया गया। लोकतंत्र में जनता के इस धन की बर्बादी की जांच तो होनी ही चाहिए।
उनके साथ सदर विधायक वीर सिंह भी मौजूद रहे और क्षेत्रीय समस्याओं का पुलिंदा सौंपा।
...तो आध्यात्मिक होते जा रहे हैं राजा भइया
चित्रकूट। कारागार और खाद्य एवं रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया आध्यात्मिक होते जा रहे हैं। अब हर माह वह कामदगिरी की परिक्रमा करने आते थे। सरकार बनने से पूर्व वह अपनी मां के साथ भी भगवान श्रीराम की तपोभूमि आए थे। जीतने के बाद कामदगिरी में उनकी आस्था और बढ़ गई है। राजा भइया मंत्री बनने से पहले भी लगभग हर महीने चित्रकूट कामदगिरी की परिक्रमा को आते रहे हैं। सरकार बनने से पहले वह अपनी मां के साथ भी आए थे। जीतने के बाद उनकी कामदगिरी में श्रद्धा और बढ़ गई। उन्होंने बार बार चित्रकूट आने की बात पर कहा कि यह सौभाग्य की बात है और प्रभु श्रीराम की विशेष कृपा और अनुग्रह है। राजा भइया सोमवार देर शाम आए थे और भोर में कामदगिरी की परिक्रमा के बाद मैहर माता के दर्शन करने मध्य प्रदेश चले गए थे। शाम को वह तीर्थक्षेत्र में रुके थे। सियाराम कुटीर आदि का भ्रमण करने के बाद वह देर शाम गृहनगर कुंडा प्रतापगढ़ रवाना हो गए।
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