जर्जर हो रहा है औरंगजेब का बनवाया मंदिर

Chitrakoot Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
देश के चार बालाजी मंदिरों में से एक है सीतापुर का मंदिर, तहसीलदार हैं प्रशासक, लेकिन देखरेख पर ध्यान नहीं देते
चित्रकूट। प्रशासन की उदासीनता के चलते सीतापुर में बादशाह औरंगजेब द्वारा बनवाया गया बालाजी मंदिर तीर्थ क्षेत्र के रुप में विकसित नहीं हो सका। इसके अलावा देखरेख और मरम्मत के अभाव में मंदिर लगातार जर्जर होता जा रहा है। जबकि पूरे देश के कुल चार बालाजी मंदिरों में एक इस मंदिर का महत्व इसलिए भी अधिक है कि इसे कट्टर बादशाह की छवि वाले औरंगजेब ने बनवाया है। बादशाह औरंगजेब द्वारा दिया गया ताम्रपत्र यहां अभी भी सुरक्षित है। कर्वी तहसीलदार मंदिर के प्रशासक हैं। लेकिन मंदिर के रखरखाव के प्रति वह पूरी तरह उदासीन हैं।
बालाजी मंदिर की देखरेख और उसके खर्चों के लिए औरंगजेब ने आठ गांवों का दान मंदिर को किया था। इन गांवों से होने वाली राजस्व आय मंदिर को दी जाती है। मंदिर के प्रशासक तहसीलदार मंदिर की जमीन में पैदा हो रही फसल तो ले जाते हैं, लेकिन यहां की पूजा पाठ और मरम्मत पर ध्यान नहीं दे रहे। इस संबंध में जिलाधिकारी डा आदर्श सिंह ने बताया कि उन्हें मंदिर के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। उसके संबध में पता करके रख रखाव के लिए जो भी उचित कदम होगा, उठाया जाएगा। जबकि कर्वी तहसीलदार का कहना है कि मामला पुराना है, वह इस मामले का संज्ञान ले रहे हैं, जैसा भी उचित होगा वैसी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
मदिर के संरक्षक एवं महंत मंगल दास के बड़े भाई बलराम दास के मुताबिक देश में तीन ही बाला जी मंदिर हैं। एक पद्मनाभ बाला जी (हनुमान जी) राजस्थान में, दूसरे तिरूपति बालाजी (भगवान विष्णु), तीसरे झांसी और दतिया के बीच में उन्नावधाम बाला जी (भगवान सूर्य) एवं चौथे बाला जी (योगमाया प्रकृति) चित्रकूट में हैं। योगमाया प्रकृति को प्रभु ने नारद मुनि को भ्रमित करने के लिए बनाया था, जिसे बाद में विष्णु भगवान ने स्वयं वरण किया।
मंदिर के इतिहास के बारे बाबा बलराम दास ने बताया कि सन् 1683 में बाबा बालक दास जी मूर्ति को आंध्रप्रदेश के तिरुपति नाथ से अपने साथ लाए थे। मूर्ति को यहीं पर रखकर पूजा अर्चना करने लगे। उस समय भारत में औरंगजेब का शासन हुआ करता था। किवदंती है कि बादशाह औरंगजेब उस समय हिंदुओं के सभी धार्मिक स्थलों को उजाड़ता हुआ चित्रकूट पहुंचा। हनुमान धारा को नष्ट करने के लिए सेना को आदेश दिया तो वहां पर वानरों ने सैनिकों को मारना शुरु कर दिया तो वह सेना समेत भाग खड़ा हुआ। उसके बाद बादशाह ने रामघाट पहुंचकर मत्तगयेंद्रनाथ पर तोड़फोड़ शुरू की तो वहां औरंगजेब और उसके सैनिकों के उपर मधुमक्खियों के झुंड ने आक्रमण कर दिया। उसके बाद बालाजी मंदिर पर आक्रमण किया तो बाबा बालक दास जी ने उसे मूर्ति को तोड़ने से मना किया, वह नहीं माना। उसके मंत्री ने जैसे ही उस मूर्ति पर प्रहार करना चाहा तो जोर की बिजली चमकी और बादशाह और उसकी पूरी सेना बेहोश हो गई। कुछ समय के बाद कुछ सैनिक होश में आए तो उन्होने बादशाह की तरफ से बाबा से क्षमा मांगी तब जाकर औँरंगजेब को होश आया।
बताते हैं होश में आने के बाद बादशाह औरंगजेब ने उसी दिन से हिंदू मूर्तियों को न तोड़ने का शाही फरमान जारी कर यहां मूर्ति के स्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया। बादशाह का शाही फरमान आज तक मंदिर में रखा है। कहा जाता है कि महात्मा बालक दास से प्रभावित होकर औरंगजेब ने बालाजी के सम्मान में मंदिर बनवाया तथा आठ गांवों का दान मंदिर को किया। दान की पुष्टि में औरंगजेब ने फारसी में फरमान जारी किया था जो मूल रुप में मंदिर में विद्यमान है। अंग्रेजों के शासनकाल में इसका अंग्रेजी में रुपांतर कराकर हाईकोर्ट से प्रमाणित करा लिया गया है। औरंगजेब के इस फरमान को आगे चलकर चित्रकूट के अधिपति पन्ना नरेश महाराज हिंदूपत ने 1814 में स्वीकार किया था। बाद में अंग्रेजों नें उसे ज्यो का त्यों बरकरार रखा।

आज भी हो रहा बादशाह के फरमान का पालन
आजाद भारत में भी हो रहा है बादशाह के फरमान का पालन। आठ गांवों का प्रतिकर मंदिर को दिया जा रहा है। स्वतंत्र भारत में भी जमींदारी उन्मूलन के बावजूद औरंगजेब के दान किए गांवों का प्रतिकर राजकोष से एन्युटी के रुप में बाला जी मंदिर को मिल रहा है। फरमान में लिखा है कि यह बादशाह के शासन के पैंतीसवें शासन काल के पैंतीसवें वर्ष के रमजान महीने की उन्नीसवीं तारीख को लिखा गया। फरमान के लेखक नवाब रफीउल कादर सआदत खां वाक्या नवीस थे। यह फरमान रमजान की पच्चीसवीं तारीख को शाही रजिस्टर में दर्ज किया गया। जिसका सत्यापन व प्रमाणीकरण मुख्य माल अधिकारी मातमिद्दौला रफीउल शाह ने किया और जमाल मुल्क नाजिम आफताब खां ने उसे शाही रजिस्टर में इंद्राज किया। राजाज्ञा में कहा गया है कि बादशाह का शाही आदेश है कि इलाहाबाद सूबे के कालिंजर परगना के अंर्तगत चित्रकूट पुरी के निर्वाणी महंत श्री बालकदास जी को श्री ठाकुर बाला जी के सम्मान में उनकी पूजा और भोग के लिए बिना- लगान माफी के रुप में आठ गांव - देवखरी, हिनौता, चित्रकूट, रौदेरा, सिरिया, पड़री, जरवा, और दोहरिया दान स्वरुप प्रदान प्रदान किए जाएंगें। 330 बीघा बिना लगानी कृषियोग्य भूमि राठ परगना के जाराखंड गांव 150 बीघा व अमरावती में 180 बीघा के साथ साथ कोनी परोष्ठा परगना की लगान वसूली से एक रुपया दैनिक अनुदान भी स्वीकृत है। फरमान में यह भी लिखा गया है कि बादशाह द्वारा आदेशित किया जाता है कि राज्य के वर्तमान तथा भावी सामंत जागीरदार व राज्याधिकारी आठों गांवों सहित दान की सारी जायदाद को पीढ़ी दर पीढ़ी बिना लगान माफी के रुप में मानते आएंगे और इसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेंगे तथा इस फरमान के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएंगे।
हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक है
बादशाह औरंगजेब का बनवाया यह मंदिर हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक है। इसे बनवाते समय बादशाह ने कहा कि यह जो मंदिर बने वह न्यारा हो, जो श्रीराम तुम्हारा है वह अल्लाह हमारा है। मंदिर के तरफ जाने वाले रास्ते में एक बड़ा गेट लगा हुआ है जिस पर मुगल कालीन नक्काशी की गई है।

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