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रिजर्व नेचर, फोन न उठाने के लिए याद आएंगे मोहित

Chitrakoot Updated Mon, 11 Feb 2013 05:31 AM IST
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चित्रकूट। आखिरकार आठ महीने के कार्यकाल के बाद पुलिस अधीक्षक मोहित गुप्ता की जिले से रवानगी हो गई। अपनी छोटी सी पारी में मोहित गुप्ता को फोन न उठाने और रिजर्व नेचर के लिए याद किया जाएगा।
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मोहित गुप्ता ने मई 2012 में यहां कार्यभार संभाला था तो लोगों को इस युवा पुलिस अधीक्षक से बड़ी उम्मीदें थीं। पर ये कितनी पूरी हुईं, इस पर कहने की जरूरत नहीं। हां, इस बात की चर्चा जरूर रही कि वह किसी भी फोन को अटेंड नहीं करते, चाहे वह किसी जानकारी के लिए मीडियाकर्मी का हो या किसी और का। इसमें उनका सीयूजी नंबर भी कभी कभार ही शायद उठा हो। आमतौर पर सार्वजनिक समारोहों से गुरेज करने वाले एसपी ने लोगों से दूरी बनाकर ही रखी। एकाध मौकों पर जनप्रतिनिधियों को भी इनकी तीखी नजरों से डर लगा और एकाध मौकों पर इन्होंने कुछ पर नजरें भी तरेंरीं, जिसका नेतानगरी में जमकर प्रचार प्रसार किया गया। हालांकि एसपी की निष्पक्षता पर शायद ही किसी को कभी शक हुआ हो। डा. तहसीलदार सिंह के जमाने में अरसे से जमे थाना प्रभारियों को इन्होंने जमकर फेंटा और लंबे अरसे बाद कुछ थानों में कामकाज भी दिखा। जिलाधिकारी डा. बलकार सिंह के साथ इनकी जोड़ी जमी भी और अवैध खनन के मामलों में कुछ कारगर काम भी नजर आया। मोहित गुप्ता के कार्यकाल में जो सबसे अधिक चर्चा और यादगार बात रही, वह था राजापुर के तत्कालीन एसओ विवेक उपाध्याय का स्टिंग आपरेशन, जिसके बाद इस विवादास्पद इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की गई।

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