‘कांग्रेस किसी धर्म, रंग का विरोध नहीं करती’

Chitrakoot Updated Mon, 28 Jan 2013 05:30 AM IST
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चित्रकूट। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने हाल ही में आए गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के बयान का बचाव कर कहा कि पार्टी ने इसका खंडन कर दिया है और अब इस प्रकरण को बंद हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी धर्म और रंग का विरोध नहीं करती और भगवा और केसरिया का देश की भारतीय संस्कृति में योगदान रहा है।
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रविवार को द्विवेदी अपने गृहजनपद आए थे। पत्रकारों से बातचीत में जब उनसे शिंदे, मणिशंकर अय्यर और दिग्विजय सिंह के आतंकियों के साथ शिष्टाचारात्मक भाषा के संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने पहले तो गोलमाल जवाब दिया और फिर खीझकर बोले कि शिष्टाचार की भी कोई भाषा होती है। भगवा आतंकवाद संबंधी बयान पर घेरा गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी किसी भी रंग और धर्म के खिलाफ नहीं है। बयानों को तोड़ मरोड़कर पेश किया जाता है। पाकिस्तान के खिलाफ केंद्र सरकार के नर्म रुख पर भी उनके जवाब में तंज ज्यादा था। उन्होंने कहा, अरे यार, आप क्या चाहते हैं कि पाकिस्तान के साथ युद्ध हो जाए? हम युद्ध की वकालत नहीं करते। आतंक के खिलाफ सरकार का रुख स्पष्ट है। राहुल के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात पर उन्होंने कहा कि अभी इसका निर्णय होना बाकी है? साथ ही प्रत्याशी भी अगर आम सहमति से तय किया जाए तो ठीक रहेगा। उधर, पार्टी कार्यालय में उन्होंने इस पर नाराजगी व्यक्त की कि जिला कमेटी के पास सदस्यता की कापियां तक नहीं हैं।


योजनाएं हमारी, बताते खुद की
एक सवाल के जवाब में जनार्दन द्विवेदी ने अफसोस जताया कि केंद्र सरकार की योजनाओं और वहां से मिले धन का प्रचार प्रसार ठीक से न होने से राज्य सरकार इसका फायदा उठाती हैं। ऐसी राज्य सरकारें भी हैं, जिनको पैसा किसी दूसरे उद्देश्य के लिए मिलता है और वे इसका उपयोग दूसरे उद्देश्य के लिए करती हैं। केंद्र की योजनाओं को अपने नाम से प्रचारित करती हैं और यह भ्रम हम दूर नहीं कर पाते।

..किसी गुप्त एजेंडे को लेकर आए हैं
चित्रकूट। राहुल गांधी के पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी संभालने के तुरंत बाद जनार्दन द्विवेदी का यहां आना राजनीतिक हल्के में हलचल का सबब बन गया है। जनार्दन द्विवेदी का चित्रकूट गृहजिला है। वरिष्ठ चिंतक और साहित्यकार योगेंद्र दत्त द्विवेदी का यह पुत्र राजनीति की सीढ़ियां चढ़ते चढ़ते उस मुकाम तक पहुंच चुका है, जहां पहुंचने की कल्पना तक बहुत से लोग नहीं करते। जनार्दन को पास से जानने वाले इस बात का भी दावा करते हैं कि उनका कोई भी कदम अप्रत्याशित नहीं होता। हर चाल सोची समझी होती है। ऐसे में राहुल गांधी के पार्टी का उपाध्यक्ष बनने और आगामी चुनाव उनके नेतृत्व में लड़े जाने की सुगबुगाहट के बीच इस वरिष्ठ कांग्रेसी का यहां आना कई मायनों से महत्वपूर्ण है।

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