किसान दिवस : डगमगाता पर्यावरण और ऋतु चक्र की अनिश्चितता से किसान परेशान

Chitrakoot Updated Sun, 23 Dec 2012 05:30 AM IST
चित्रकूट। डगमगाता पर्यावरण संतुलन और ऋतु चक्र की अनिश्चितता जिले के किसानों के लिए भारी पड़ रही है। कृषि के जानकार सलाह देते हैं कि किसान यहां पानी का संचयन तो सीखे ही साथ ही फसल चक्र का फिर से निर्धारण करे। पिछले दिनों गनीवां में किसानों को जागरूक करने के लिए हुई गोष्ठियों में भी किसानों को परंपरागत खेती से इतर सस्ती और लाभदायक खेती करने के लिए जागरूक किया गया।
जिले में कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 316.43 हजार हेक्टेयर भूमि में कृषि योग्य 158.34 हजार हेक्टेयर व 8.42 हजार हेक्टेयर भूमि बंजर है। वनों का कुल क्षेत्रफल 23.33 हजार हेक्टेयर है। स्थाई चारागाह के रूप में .13 हजार हेक्टेयर भूमि का प्रयोग होता है। यहंा मुख्य रूप से राकड़, मार्क, काबड़ व पढवा चार तरह की मिट्टी होती है जिसमें गेंहू, चना प्रमुखता से पैदा की जाती है। उप कृषि निदेशक जगदीश नारायण ने बताया कि खेती लायक पानी की यहां काफी कमी है। इसके लिए किसान खेत का पानी खेत में तरीका अपना कर और सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर सेट का प्रयोग करके कम पानी में भी अच्छी पैदावार कर सकता है। किसान खुद एक वैज्ञानिक की तरह प्रयोगशाला से मृदा नमूने लेकर मिट्टी की पहचान करें साथ ही खेत में गड्ढा बनाकर कूड़ा, जानवरों का मल व केचुएं पाल कर स्वयं की खाद तैयार करे। उन्होंने कहा कि किसान की स्वयं तैयार खाद के साथ महज रसायनिक खाद ही फसल के लिए प्रर्याप्त है। एक अच्छी नस्ल की फसल के लिए किसानों को चाहिए की वह अपनी फसल से ही बीज भी बना लें जिससे उन्हें कम कीमत में बीज भी उपलब्ध होगा। कृषि चक्र की अनिश्चितता की वजह से किसानों को अब पारंपरिक की जगह सब्जी, फल-फूल आदि की खेती करने का सुझाव भी दिया जाता रहा है।
कृषि अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार दो विशेष योजनाएं आत्मा और नेशनल फूड के माध्यम से किसानों को नि:शुल्क बीज, कृषि यन्त्र व खाद को उपलब्ध कराता है। प्रर्दशनी करके किसानों को कृषि यत्रों की कीमत में छूट देकर बिक्री भी की जाती है। विभाग भी मैक्रोमेड, आइसोफाम, कृषि सूचना यंत्र, मृदा प्रयोगशाला जैसी योजनाओं में बीज व कृषि यत्रों के नि:शुल्क वितरण के साथ किसानों को जागरूक करता है। जो किसान फसल चक्र अपनाकर खेती करते हैं वह सही मायने में एक जागरूक और सफल किसान की श्रेणी में आता है। गर्मी के मौसम में किसान खेत को खाली छोड़ देता है जबकी किसान को अगर छोड़ना ही है तो वह खेत में कल्टीवेटर से जुताई करदे जिससे वर्षा होने पर खेत की जमीन के दो फुट अन्दर तक पानी जमा होगा व लम्बे समय तक नमी बनी रहेगी और फसल की दो गुना छमता भी बढे़गी। किसान को हलांकि रबी के बाद गर्मीयों में भी उड़द, मूंग, व सब्जीयों को लगाना फायदे मंद होगा और इससे अन्ना प्रथा में भी कमी आएगी। किसान इन सब बातों से यदि जागरूक होकर खेती करे तो निश्चय ही उसे कभी निराश नहीं होगी शासन किसानों को ऋण की भी मुहैया कराता है लेकिन जागरूकता न होने से किसान अपनी खेती में खरा नहीं उतर पाता जिससे या तो वह शासन से ऋण माफी की उम्मीद करता है या फिर आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाता है।

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