हीलाहवाली की नजीर बना चिल्लीमल पंप कैनाल

Chitrakoot Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
स्थाई पंप लगाने की कार्ययोजना निर्धारित समय में कैसे होगी पूरी
मधुरेंद्र प्रताप सिंह
राजापुर (चित्रकूट)। सिंचाई के लिए बनी सरकार की योजनाओं का क्या हाल होता है, इसकी नजीर बन चुका है राजापुर क्षेत्र में चिल्लीमल पंप कैनाल। अस्थाई पंप की जगह कोठियां बनाकर स्थाई पंप लगाने की कार्ययोजना निर्धारित समय में पूरी होती नजर नहीं आ रही। इसके लिए मौसम तो कभी धनाभाव का रोना रोया जा रहा है।
चिल्लीमल पंप कैनाल चिल्लीमल गांव के पास बनी इलाके की एक महत्वपूर्ण नहर है। इससे यमुना नदी से पानी लिफ्ट कर पांच पंपों के सहारे आसपास के गांवों में नहर और उसकी शाखाओं से भेजा जाता है। इस नहर से चिल्लीमल, बिलास, तीरधुमाई, वीरधुमाई, बरद्वारा, अतरौली, हस्ता, नैनी, खउरहला, बिहरवां, खोपा, भदेदू, सुरवल, देवारी आदि लगभग पचीस गांवों के किसानों की लगभग पचास हजार बीघे की सिंचाई होती है। पंप कैनाल में अभी अस्थायी व्यवस्था है और पांच पंपों के सहारे पानी लिफ्ट कर नहरों में छोड़ा जाता है। इसमें दिक्कत यह आती है कि एक तो पंप को जोड़ना निकालना पड़ता है, दूसरे पाइप लाइन भी जर्जर होती है और इससे पानी लीकेज होता रहता है। ऐसे में टेल के गांव खोपा, भदेदू आदि में पानी पहुंचने की संभावना न के बराबर हो जाती है। इस समस्या को दूर करने के लिए सिंचाई विभाग ने कोठियों में स्थाई पंप लगाने की कार्ययोजना बनाई है।
इन कोठियों में सीधे यमुना से पानी उठाकर नहरों में छोड़ा जाएगा और भारी वेग की वजह से टेल तक पानी पहुंच जाएगा। इसका ठेका यूपीपीसीएल (उप्र प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड) की बांदा इकाई को सौंपा गया। पर अभी तक यहां फाउंडेशन ही हुआ है। लगभग पचीस गांवों को सींचने वाली इस पंप कैनाल में शुरुआती दिनों के अलावा शायद ही कभी टेल के गांवों तक पानी पहुंचा हो। इसके लिए अधिकारियों की उदासीनता तो दोषी है ही, इसका खामियाजा किसान उठा रहा है। अब स्थाई कोठियों को बनाने की देरी से भी किसान आक्रोशित हैं। चिल्लीमल प्रधान करुणेश मिश्र, सुशील मिश्र, संजय उपाध्याय नैनी, लखनपाल सिंह देवारी, रोशन सिंह भदेदू, राजकुमार सिंह प्रधान बरद्वारा आदि का कहना है कि इस तरह की योजनाओं का क्या फायदा जो समय से पूरा न हों और अधिकारी उदासीन रहें। जब तक अधिकारियों में जिम्मेदारी का भाव पैदा न होगा, कुछ होने वाला नहीं।
निर्धारित समयावधि में कैसे पूरा होगा काम
यूपीपीसीएल का यह प्रोजेक्ट देख रहे संस्था अधिकारी मनोज शर्मा ने बताया कि काम को अक्तूबर 2010 में शुरू किया गया और इसके अक्तूबर 2014 में पूरा होना था। पर अब यह निर्धारित समयावधि में पूरा होना संभव नहीं नजर आता। बताया कि इसके लिए तब 24 करोड़ रुपए की स्वीकृति हुई थी, जिसमें से 12 करोड़ खर्च हो चुके हैं। अगली किस्त मांगी गई है। बताया कि अब विभिन्न निर्माण सामग्री की कीमतें बढ़ जाने से अब कुल लागत 36 करोड़ पहुंच गई है। उधर सिंचाई विभाग के एई बालकिशन सिंह भी मानते हैं कि सरिया सीमेंट आदि का रेट बढ़ने से निश्चित रूप से निर्माण लागत बढ़नी है। बताया कि अभी 70 करोड़ रुपए की लागत मानी जा रही है, जिसमें बिजली पावर, पंप व्यवस्था और निर्माण कार्यों के लिए अलग अलग इस्टीमेट है। इस पंप की जल संग्रहण क्षमता 120 क्यूसिक है और इसे बढ़ाने के लिए अनुरोध पत्र भेजा गया था पर वह स्वीकृत नहीं हो सका। अधिकारियों का कहना है कि इसके अलावा बारिश की वजह से भी कई महीने काम रुका पड़ा रहता है।

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