कड़े रुख के बाद भी नहीं रुक रहा अवैध खनन

Chitrakoot Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
मऊ(चित्रकूट)। हाईकोर्ट भले ही अवैध खनन के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर रही है, प्रशासन भी अवैध खनन को लेकर कड़ाई कर रहा है लेकिन अवैध खनन है कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। लोगों का मानना है कि अवैध खनन में बडे़ ठेकेदारों का हाथ नहीं है बल्कि निजी ट्रैक्टर रखने वाले लोग ही इसके लिए जिम्मेदार है। इससे क्षेत्रीय निवासियों को असुविधा भी होती है पर अवैध खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
जिला प्रशासन के कडे़ रुख के बाद भी कस्बे में कई स्थानाें से अवैध खनन जारी है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 फरवरी को और 1 अक्तूबर 2012 को हाइकोर्ट ने आदेश जारी कर ऐसी सभी खनन गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए थे जिनको पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र नही मिले हैं। कोर्ट ने कई जिलों के कलेक्टरों को भी अवमानना नोटिस भी जारी किया है। जिले में अवैध खनन रोकने के लिए जिला प्रशासन भी कड़ा रुख अख्तियार कर रहा है। बीते एक सप्ताह में एसडीएम मऊ सीपी उपाध्याय ने और खनिज अधिकारी ने कुल मिलाकर एक दर्जन ट्रैक्टरों का चालान भी किया पर उसके बाद भी ट्रैक्टर मालिक अवैध खनन से बाज नही आ रहे है। लोगों का कहना है कि अब तो शाम ढलते ही अवैध खनन में लिप्त ट्रैक्टर मालिकों की धमाचौकड़ी आम हो जाती है। मऊ से वियावल रोड तक तो ट्रैक्टर चालकों की आवाजें लोगों की नीद हराम कर देेती हैं। उनसे उड़ने वाली धूल से तो सांस लेना भी दूभर हो जाता है। क्षेत्र में भिटारी, टिढ़िहा, महेवा आश्रम, छतैनी, कुनियां, मनका, गौरिया, बरगढ़, मुरका, कोलमजरा, गढ़वा, कोटरासेमरा, महेवा, ऋषियन आदि क्षेत्रों से मोरंग व पत्थरों के अलावा मऊ से वियावल घाट के पास हरदी, लोढ़ौता, तुरगवां, खोहर, छिऊलहा, पंचमुड़ा, खंडेहा, हनुमानगंज, नेवरा और औझर के यमुना घाटों से सफेद बालू का अवैध खनन जारी है। प्रशासन की सक्रियता से तो खनन करने वाले ज्यादा सतर्क हो गए हैं और नाके नाके पर अपने लोगों को सेट कर दिया है जो अधिकारियों की रेट के समय ट्रैक्टर मालिकों को सूचित भी करते हैं।

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...तो बेरोजगारी भी एक कारण
लोगों की मानें तो जिले की बेरोजगारी भी एक कारण है। क्षेत्र के बेरोजगार युवकों ने लोन लेकर ट्रैक्टर निकाल लिए हैं। ट्रैक्टर मालिकों का कहना है कि किश्त जमा करने के लिए कुछ ना कुछ तो करना ही पडे़गा। उन्होंने बताया कि लीज के पट्टों से निकलने वाली बालू व पत्थर का रवन्ना पांच सौ रुपया लगता है जो काफी अधिक है उसे बचाने के लिए ही अवैध खनन का खेल जोरों पर जारी है। उन्होंने बताया कि एक ट्राली के पत्थरों व बालू के लिए आठ सौ रुपए व मजदूरी दो सौै रुपए लग जाती है उसके अलावा खनन क्षेत्र से कस्बे तक लाने में 200 रुपए का डीजल खर्च हो जाता है कुल मिलाकर वैध रूप से बालू ढोने से 2000 रुपए में बिकता है जो मंहगा भी बिकता है जबकि चोरी की बालू कम दाम की होने से अधिक लोग खरीदते हैं।

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एसडीएम बोले - काफी तगड़ा नेटवर्क है अवैध खनन में लिप्त लोगों का
उपजिलाधिकारी मऊ सीपी उपाध्याय ने बताया कि अवैध खनन में लिप्त लोगों के क्षेत्रीय होने की वजह से थोड़ी दिक्कतें आ रही हैं। उनके नेटवर्क तेज है और हर नुक्कड़ पर उनके लोग होते है जो अधिकारियों के दौरे की सूचना उनको फोन से दे दे रहे हैं। उन्होने बताया कि तेजी से चेकिंग की जा रही है और घाटों व खदानों की तरफ जाने वाले रास्तों पर रात में पिकेट ड्यूटी लगा दी गई है लेकिन क्षेत्रीय होने से ये रास्ता भी बदल लेते हैं। एक दिक्कत और आती है कि लोग ट्रैक्टरों में हाइड्रोलिक भी लगवाएं हैं जिससे सूचना मिलते ही वे अपनी ट्राली किसी गुप्त स्थान पर खाली कर देते हैं और खाली ट्रैक्टरों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। उन्होंने बताया कि इसके बारें में डीएम से विचार विमर्श करके ट्रैक्टरों में हाइड्रोलिक अवैध घोषित करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। उन्होेंने बताया कि इधर बीच में कई एक पर तो कार्रवाई भी की है। इस समय अवैध खनन कुछ कम भी हुआ है लेकिन पूरी तरह से इसे रोकने के लिए अभी काफी मेहनत करनी पडे़गी।

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