मुख्यमंत्री जी! नहरों और पंप कैनालों पर भी डालिए नजर

Chitrakoot Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
राजापुर (चित्रकूट)। सिंचाई मंत्री आकर चले गए पर किसानों की चिंता जस की तस है। इससे लोगों को लगता है कि जिम्मेदारों को इसकी कोई चिंता नहीं। न तो सिल्ट सफाई की जा रही है और न पंप कैनालों को दुरुस्त किया जा रहा है। राजापुर पंप कैनाल की तरह ही चिल्लीमल पंप कैनाल का बुरा हाल है। कई जगह से लीकेज के अलावा मात्र दो पंप ही चल रहे हैं। अब मुख्यमंत्री के आगमन पर किसानों को उम्मीद है कि उनकी ओर शायद कोई ध्यान दे।
चिल्लीमल पंप कैनाल में लगा एक सौ क्यूसिक का बोर्ड केवल दिखावा है। इस भाव के साथ किसानों का कहना है कि नहर की क्षमता का केवल एक चौथाई पानी ही वर्तमान में चल रहा है, जिससे इलाके की लगभग चार हजार बीघे की धान की फसल चौपट होने की कगार पर है। किसानों को इस बात की चिंता है कि ऐसे में रबी की फसल का पलेवा किस तरह हो पाएगा। चिल्लीमल पंप कैनाल का सन् 1972 में विधायक और कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे राधाकृष्ण गोस्वामी की पहल पर शिलान्यास हुआ था, जो 1976 में चालू हुई। दो दशक तक तो इस पंप कैनाल से लोगों को काफी फायदा हुआ पर इसके बाद टेल तक पानी पहुंचना ही बंद हो गया। एक कारण जहां नहरों की साफ सफाई में जिम्मेदारों का मुंह मोड़ना रहा तो दूसरी तरफ पंप कैनाल का पूरी क्षमता से न चलना भी बड़ी वजह रही। चिल्लीमल प्रधान करुणेश मिश्र कहते हैं कि नहर में पानी के लिए चार पंपों की व्यवस्था है, जिसमें दो पंप ही वर्तमान में सही सलामत दिखते हैं और इनमें से अब एक पंप चालू हालत में है। एक पंप के सहारे चार हजार बीघे की फसल की सिंचाई कैसे हो सकेगी, यह बड़ा सवाल है। जिम्मेदारों से बात करने पर वह शीघ्र ही व्यवस्था दुरुस्त होने का टालू जवाब देकर कर्त्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं। चौदह हजार रकबे वाले चिल्लीमल गांव के लिए ही इतना पानी पर्याप्त नहीं है। गांव के आधे रकबे में किसान रबी की फसल बोने को तैयार बैठे हैं पर यह कैसे हो पाएगा, उनको शायद खुद पता नहीं। गांव के देवनारायण द्विवेदी ने बताया कि नहर में लगे पाइप तक जर्जर हो चुके हैं, पाइपों में कई जगह से लीकेज है, जिससे रहा सहा पानी भी निकल जाता है। बरद्वारा प्रधान राजकुमार सिंह का कहना है कि नहर की पेटी में गोंद, घास और झाड़ियों की भरमार है, जिस वजह से आगे के गांवों में पानी बमुश्किल आ पाता है। सफाई के नाम पर इनकी ही छंटाई कर दी जाती है। खुदाई सही ढंगसे न कराए जाने से पेटी में सिल्ट जमती जा रही है। भदेहदू प्रधान सत्यनारायण का कहना है कि उनका गांव टेल के गांवों में आता है। दो दशक से गांव के किसानों को नहर का पानी नसीब नहीं हो सका है। चिल्लीमल पंप कैनाल से चिल्लीमल, विलास, बीर घुमाई, बरद्वारा, नैनी, चांदी, तीर घुमाई गंगू, धौरहरा, बिहरवां, गुरगौला, अतरौली, बकटा, सुरवल, हस्ता, खोंपा आदि लगभग डेढ़ दर्जन गांवों की सिंचाई की व्यवस्था की जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी यहां कभी कभार ही आते हैं। नहर के लिए बिजली की अलग से व्यवस्था है वह भी नाम की। नाती यादव, रामस्वरूप यादव, रामबरन वर्मा, चंद्रपाल मिश्र, राधाकृष्ण चतुर्वेदी चिल्लीमल, संगमलाल प्रधान, हर्षनारायण त्रिपाठी तीरघुमाई, संजय उपाध्याय नैनी, हरबंश सिंह बरद्वारा, दरबारी पिढ़िया, वीर सिंह अभई यादव विलास, केवल प्रसाद यादव, सुभाष चंद्र मिश्र चांदी, श्याम प्रधान हस्ता, सूर्यदत्त सुरवल, शारदा निषाद आदि किसानों ने सभी पंपों को दुरुस्त करने के लिए मुख्यमंत्री से ध्यान आकृष्ट करने का अनुरोध किया है।

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