दुश्मनों को मौत देने में ददुआ के नक्शेकदम पर बलखड़िया

Chitrakoot Updated Wed, 10 Oct 2012 12:00 PM IST
पुलिस को मुखबिरों की सुरक्षा में गंभीरता दिखानी होगी
चित्रकूट। पुलिस की नाक में दम किए दस्यु बलखड़िया उसी तर्ज पर चल निकला है, जिस पर कभी ददुआ उर्फ शिवकुमार पटेल चलता था। ददुआ अपने दुश्मनों और मुखबिरों को नहीं छोड़ता था और उन्हें मौत भी दहलाने वाली देता था। हाल ही में पुलिस के हत्थे चढ़े बलखड़िया गिरोह के सक्रिय सदस्य ननका कोल ने भी इस बात की पुष्टि की है कि मौत देने में बलखड़िया भी बहुत क्रूर है।
पुलिस ने बीते दिनों बलखड़िया गैंग के तीन हजार के इनामी बदमाश ननका कोल पुत्र मोहनलाल कोल निवासी धौरहा मजरा बहिलपुरवा को पकड़ा है। बलखड़िया के खिलाफ इस समय अभियान छेड़े चित्रकूट पुलिस की यह अहम कामयाबी मानी जा सकती है। माना जा रहा है कि इससे गिरोह के बारे में कई महत्वपूर्ण राजफाश कराने में मदद मिल सकेगी। ननका एक फरवरी 2012 में गैंग के सदस्य बुद्धराज कोल निवासी दुधबरिया की हत्या में बलखड़िया के साथ सह आरोपी है। ननका ने पुलिस को बताया कि बुद्धराज कोल को मुखबिरी के आरोप में बलखड़िया और अन्य सदस्यों ने पत्थरों से कुचलकर मार डाला था। ननका के अनुसार, बलखड़िया मुखबिरी करने वालों और अपने दुश्मनों को पहले एक दो नहीं बल्कि कई राउंड गोलियों से मारता है और बाद में उसे जला देता है। हत्या करने के लिए वह कोई भी रास्ता चुन सकता है, जिससे उसका दुश्मन तड़पे। ननका ने पुलिस को बुद्धराज की हड्डियां और राख भी बरामद कराई है, जिसे अब पुलिस डीएनए टेस्ट को भेजेगी। बलखड़िया की पिछली वारदातें भी इस बात की पुष्टि करती हैं कि यह दुर्दांत डकैत किस बेरहमी से हत्या करता है। कभी रागिया के साथ रहे बलखड़िया ने कई वारदातों में उसका साथ दिया। सन् 2010 में फतेहगंज निवासी सुभाष पटेल, जो ठेकेदारी करता था और जिस पर गैंग के लिए मुखबिरी करने के आरोप लगे थे, बलखड़िया ने गद्दारी का आरोप लगाते हुए बेरहमी से मारा था। बाद में पुलिस को उसकी लगभग राख में बदल चुकी लाश कोल्हुआ के जंगल में एक पेड़ से बंधी हुई मिली थी। इसके पहले 18 मार्च 2009 में बिछियन के सामूहिक हत्याकांड को कौन भूल सकता है। इसमें इन दोनों गिरोहों ने 12 लोगों को जिंदा जला दिया था। परिवार का मुखिया तब तो बच निकला था पर बाद में उसे भी गिरोह ने मौत के घाट उतार दिया था। इस मामले में पारिवारिक दुश्मनी की बात सामने आई थी। 2011 में डोडामाफी गांव में देशराज कोल की धारदार हथियारों से कटी और जली लाश बरामद हुई थी और तब भी हत्या के तरीके को देखते हुए साफ हो गया था कि यह वारदात भी बलखड़िया गैंग ने की है। इसके अलावा बुद्धराज कोल की हत्या कर उसे जला देने की वारदात भी बलखड़िया की क्रूरता की कहानी कहती है। बीहड़ के सूत्र बताते हैं कि बलखड़िया को अपने दुश्मन और मुखबिर को एक दो गोलियां उतारने से संतोष नहीं होता। इसके उदाहरण में वे लोग नौ अगस्त को डोडामाफी में एक ही परिवार के नौ लोगों की हत्या, जिसमें दर्जन भर खोखे बरामद हुए थे, और मड़ैयन में संतोष सहित तीन लोगों की हत्या की वारदात को रखते हैं। इस तरह जाहिर है कि बलखड़िया कभी आंतक मचाए रहे ददुआ की तर्ज पर है और अपने दुश्मनों को न छोड़कर खौफ कायम रखना चाहता है। मप्र और उप्र के सीमावर्ती गांवों में आतंक का पर्याय बन चुके बलखड़िया की तलाश में हालांकि जिले की पुलिस गंभीर है पर पुलिस के जिम्मेदारों को अपनी चौकसी बढ़ाने के साथ ही मुखबिरों की सुरक्षा पर भी गंभीरता दिखानी होगी।

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