नहरों की हालत खस्ता, सिल्ट सफाई कागजों में

Chitrakoot Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
नहरों की दशा देख किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें
ओहन नहर का हाल: न नहर खुदी और न पेड़ साफ हुए
सरैंया (चित्रकूट)। जिले में नहरों की हालत खस्ता है। सिल्ट सफाई न होने से तय है कि आगामी फसल सत्र में किसानों को पानी छोड़े जाने के बाद भी पानी मिल ही जाएगा, इस बात की कोई गारंटी नहीं है। नहरों की वर्तमान हालत को देखकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं।
सिल्ट सफाई का काम कागजों में होने का आरोप विभागीय जिम्मेदारों पर हमेशा से लगता रहा है। हाल ही में बुंदेली सेना नहरों को साफ न किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी भी दे चुकी है। ओहन बांध से निकली नहर सेमरदहा गांव में दो भागों में बांट दी गई है। एक शाखा भौंरी, ब्यूर, नादी तौरा आदि गांवों की ओर चली जाती है। दूसरी शाखा मालिन टंकीहोते हुए पड़री, नया चंद्रा, अगरहुंड़ा, अरवारा, गिरधारा, रैपुरा, अहिरा, मगरहाई, बांधा आदि गांवों से होती हुई बेराउर के पास जमुना नदी में चली गई है। ऐसे में लगभग अस्सी गांवों की एक हजार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई बाधित होती है। ग्रामीणों का तो कहना है कि 2003 से यहां सफाई हुई ही नहीं। आरोप लगाया कि सिल्ट सफाई के नाम पर हजारों का वारा न्यारा कर लिया गया। पड़री गांव के पास यह नहर पूरी तरह से टूटी है। अगरहुंड़ा गांव के पास तो नजारा ही देखने लायक है। इसकी और सड़क की सतह एक है। ऐसे में टेल के गांवों में तो पानी पहुंच ही नहीं सकता। ग्रामीण बताते हैं कि पिछली बार जब पानी छोड़ा गया था तो पानी सड़क तक पहुंच गया था और इसका फायदा किसानों को मिला ही नहीं था। रैपुरा गांव से भी नगर की दो शाखाएं छोड़ दी गई हैं। पहली शाखा से देवकली, पकौरा, देहरुछ, भुजौली, गड़वारा होते हुए नहर गई है और दूसरी शाखा बरहट, घुरेहटा, सिंहपुर, अमरपुर होते हुए छीबों आदि गांवों में इससे सिंचाई होती है। इस संबंध में अवर अभियंता सिंचाई महेंद्र सिंह ने माना कि नहर में दो साल से सिल्ट सफाई नहीं हुई है। बताया कि इस काम को बुंदेलखंड पैकेज से किया जाता है और पैसा इस मद में आने पर सफाई करा दी जाएगी। हालांकि वह समय सीमा नहीं बता सके। साथ ही वह यह भी नहीं बता पाए कि टेल के पास कौन से गांव हैं और कितने गांव इस नहर की जद में पड़ते हैं। उन्होंने यह दावा जरूर किया कि हर साल पानी छोड़े जाने पर टेल तक यह पहुंच जाता है। उधर, यह भी गौरतलब है कि सिंचाई विभाग ने नहरों के पानी छोड़े जाने के लिए रोस्टर तय कर लिया है। इसके अनुसार, पांच नवंबर को ओहन नहर खोली जाएगी।
इनसेट-
बड़े-बड़े बबूल के पेड़ बयां करते हकीकत
पंडरी के शंभू, संगम, अगरहुंड़ा के रामकल्याण, ओम पयासी, अरवारा के विवेक, रैपुरा के प्रेमचंद्र, लोकपाल, शिवबचन, हेमराज, बांधा के बद्री प्रसाद पांडे, अहिरा के हरिओम आदि ने बताया कि कई बार इस संबंध में अधिकारियों और कर्मचारियों से कहे सुने जाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई, जिससे अब रबी की फसल को लेकर आशंका है। किसानों ने बताया कि नहरों में गोंद घास सबसे खतरनाक होती है और इसको काटने में बहुत दिक्कत आती है। बड़े-बड़े बबूल के पेड़ इस बात की तस्दीक करने के लिए काफी हैं कि सफाई कब से नहीं हुई है।

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