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ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की अनियमित कटौती से बढ़ी परेशानी

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Fri, 12 Jul 2019 12:42 AM IST
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बरसात शुरू होते ही बिजली की अनियमित कटौती को लेकर ग्रामीणों की परेशानी बढ़ने लगी है।इिसे लेकर उनमें नाराजगी है। उन्होंने बिजली आपूर्ति में सुधार न किए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
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सकलडीहा में बिजली कटौती से आक्रोशित ग्रामीणों ने गुरुवार बिजली उपकेंद्र के एक्सईएन कार्यालय पहुंचकर जमकर नारेबाजी की। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया। एक्सईएन रामपाल द्वारा शाम तक आपूर्ति शुरू कराने का आश्वासन देने पर ग्रामीण शांत हुए।
युवा संघर्ष मोर्चा के सदस्यों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभागीय लापरवाही के कारण ग्रामीण से लेकर तहसील मुख्यालय की आपूर्ति अनियमित हो गयी है। कहा कि बीते तीन दिनों से चहनिया, कमालपुर और सकलडीहा फीडर खराब पड़े हैं। शिकायत के बावजूद विभागीय अधिकारी और कर्मचारी चुप्पी साधे हुए है। एक्सईएन रामपाल ने शाम तक आपूर्ति बहाल कराने का आश्वासन देकर ग्रामीणों को शांत कराया। विरोध जताने वालों में अजय सिंह, शैलेंद्र पांडेय, रूद्र पाठक, अवनीश पांडेय, शैलेष मिश्रा, ऋषभ, अमित तिवारी, विनय पांडेय, शिवा मिश्रा, मोनू मिश्रा शामिल रहे।
चहनिया संवाददाता के अनुसार, विद्युत विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों की उदासीनता व लापरवाही से 48 घंटे से चहनियॉ व मारूफपुर विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े सैकड़ों गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं। बिजली न रहने से पेयजल आपूर्ति व संचार सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि विद्युत रोस्टर नाम की कोई चीज ही नहीं रह गई है। रोस्टर के बारे में पूछे जाने पर विभागीय अधिकारी उपभोक्ताओं के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं। विद्युत अभियंता मनोज पटेल ने बताया कि आपूर्ति का प्रयास किया जा रहा है लेकिन कब तक हो पायेगा यह बताना मुश्किल है।
कंदवा संवाददाता के अनुसार, अमड़ा विद्युत उपकेंद्र से संचालित ररुआ फीडर में आयी गड़बड़ी के चलते दर्जनों गांवों की विद्युत आपूर्ति 24 घंटे से ठप है। बिजली के अभाव में लोगों के घरों में लगे विद्युत उपकरण शोपीस बनकर रह गए हैं। इसे लेकर लोगों में बिजली विभाग के प्रति काफी नाराजगी है।
अमडा विद्युत उपकेंद्र से संचालित ररुआ, जेवरियाबाद, धीना, असना, ककरैत और विश्व बैंक फीडर से लगभग 120 गांवों को विद्युत आपूर्ति की जाती है। ररुआ फीडर में बुधवार की शाम फाल्ट आने के कारण दर्जनों गांवों की विद्युत आपूर्ति ठप है। इससे लोगों को मोबाइल चार्ज करने के लिए भी इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। विभागीय कर्मचारियों से शिकायत के बावजूद गुरुवार की शाम तक विद्युत व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई थी । क्षेत्र के लोगों ने उच्चाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए शीघ्र आपूर्ति शुरू किए जाने की मांग की है। इस संबंध में अमड़ा शस्त्रित्त्वद्युत उपकेंद्र के जेई जेके पटेल ने कहा कि कि फाल्ट ढूंढा जा रहा है। फाल्ट मिलते ही उसे दुरुस्त कर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
बिजली आपूर्ति ठप होने से हुई दिक्कत
इंसुलेटर में गड़बड़ी आने से उत्पन्न हुई समस्या
गुरुवार की शाम पौने चार बजे सप्लाई शुरू होने पर लोगों ने ली राहत की सांस
अमर उजाला ब्यूरो
पीडीडीयू नगर। इंसुलेटर में गड़बड़ी आ जाने से लगभग आधे नगर की बिजली आपूर्ति बुधवार की रात से गुरुवार की शाम तक ठप रही। इससे फीडर नंबर दो के लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। इससे उपभोक्तओं ने नाराजगी रही।
बुधवार की रात 12 बजे के लगभग जब फीडर नंबर दो से जुड़े उपभोक्ता गहरी नींद में सो रहे थे तभी लाइट चली गई। इसके बाद पूरी रात बिजली नहीं आई। गुरुवार की सुबह नौ बजे तक जब लोगों को बिजली के दर्शन नहीं हुए तो उनकी परेशानी बढ़ने लगी। बिजली न रहने से उन्हें पानी भी नहीं मिला। कार्यदिवस व स्कूलों के खुले होने के कारण दफ्तर जाने वाले लोगों के साथ स्कूली बच्चों को तैयार होने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सुबह के 10 बजे तो लोगों ने बिजली विभाग के आफिस के साथ विभागीय अधिकारियों को फोन घनघनाना शुरू कर दिया। तब उन्हें पता चला कि किसी इंसुलेटर में पंचर आ जाने के कारण बार-बार बिजली चली जा रही है। विभाग के कर्मचारी गड़बड़ी खोजने में जुटे हुए हैं। शाम को पौने चार बजे कर्मचारियों ने गड़बड़ी खोजकर उसे दुरुस्त किया तब जाकर आपूर्ति सुचारू हो सकी और फीडर से जुड़े लोगों ने राहत की सांस ली। लोगों का कहना था कि इस वर्ष पिछले वर्ष की अपेक्षा बिजली आपूर्ति ज्यादा परेशान कर रही है। गर्मी के मौसम से शुरू हुई गड़बड़ी बरसात आरंभ होने के बाद भी जारी है। इस संबंध में विद्युत वितरण उपखंड दो के अधिशासी अभियंता प्रवीन कुमार सिंह ने बताया कि फीडर नंबर दो के पथरा इलाके में इंसुलेटर में गड़बड़ी आने के कारण बिजली सप्लाई बाधित थी। दिन में रुक-रुककर हो रही बरसात के कारण कर्मचारियों को फाल्ट खोजने में परेशानी हो रही थी।
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