सफलता की कुंजी है गीता: स्वामी अड़गड़ानंद

Chandauli Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
मुगलसराय। शहाबगंज विकास क्षेत्र के फत्तेपुर गांव में कर्मनाशा की दहलीज पर अध्यात्म की सरिता में हजारों भक्तों ने शुक्रवार को डुबकी लगाई। क्षेत्र की फिजा में गीता की पंक्तियां पूरे दिन तैरीं तो कर्तव्य और अकर्तव्य के बीच शाश्वत सत्य का बोध भी भक्तों को कराया गया। अवसर था फत्तेपुर गांव स्थित परमहंस आश्रम में विश्वगुरु से विभूषित परमहंस स्वामी अड़गड़ानंदजी के प्रवचन और भंडारे का। इस दौरान उनके दर्शन पूजन के लिए लोगों का ऐसा सैलाब उमड़ा की भक्ति की गंगा से गांव का जर्रा जर्रा रोमांचित हो उठा।
इस अवसर पर भक्तों को संबोधित करते हुए परमहंस स्वामी अड़गड़ानंदजी ने कहा कि गीता प्रत्यक्ष दर्शन है और गीता सफलता की कुंजी है। महराज जी ने गीता को विशुद्ध मनुस्मृति बताते हुए कहा कि जिस भगवान को हम चाहते हैं, जिनके हम अंश हैं, उन्हीं भगवान श्रीकृष्ण के श्रीमुख की वाणी गीता है। आपका आदि शास्त्र गीता है। हाथ पैर वाला मनुष्य बाद में जन्मा और गीता पहले ही प्रसारित हो गई। पहले इसे स्मृतियों में धारण करने की परंपरा रही। मनु महाराज को भी गीता भगवान सूर्य से विरासत में मिली। हम सभी राजा मनु के वशंज हैं। श्रुत ज्ञान की इस परंपरा को वेदव्यास ने सुधारा और उसे लिपिबद्ध कर दिया। बाद में वेदव्यास जी ने स्वंय निर्णय दिया कि गीता सुगीता कर्तव्या...। अर्थात जब गीता भगवान श्री कृष्ण के श्रीमुख की वाणी है तो अन्य शास्त्र के पचड़े में पड़ने की क्या आवश्यकता है। एक ही धर्म शास्त्र है गीता, एक ही देव है परमात्मा और उसे पाने का एक ही मंत्र है ओम और कर्तव्य पथ भी एक ही, उस परमदेव परमात्मा की प्राप्ति। इस शास्त्र विधि को त्याग कर जो अन्य अन्य विधि से भजते हैं वह अज्ञानी हैं। श्री महाराज जी ने कहा कि गीतोक्त साधना समझ में आ गयी, थोड़ा संयम सध गया, तो फिर उस योग का कभी नाश नहीं होगा। इस प्रकार अनेक जन्मों के अंतराल के बाद उस धाम तक पहुंच जाता है जो परम धाम है। आत्मा का उत्थान करने वाला भजन ही धर्म है। इस धर्म का स्वल्प अभ्यास जन्म मृत्यु के महान भय से उद्धार करने वाला होता है। उन्होंने कहा कि जहां भगवान होंगे वहीं श्री है, ऐश्वर्य है और सभी विभूतियां हैं। उन्होंने भक्तों से कहा कि यदि मांगना है तो भगवान से स्वर्ग और वस्तु नहीं, बल्कि भगवान को मांगों, क्योकि वे अविनाशी हैं, वे सदैव रहेंगे और जहां भी रहेंगे वहां ऐश्वर्य रहेगा। उन्होंने कहा कि जिस दिन हर परिवार में गीता पहुंच जाएगी, उस दिन जाति-पांति धर्म मजहब का भेदभाव स्वत: समाप्त हो जाएगा।

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