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पेट के लिए होटल, ढाबों पर पसीना बहा रहे बच्चे

Chandauli Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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चंदौली। तमाम अभियानों और सरकारी योजनाओं के बावजूद होटल, ढाबों और रइसों के बंगलों पर पेट के लिए पसीना बहाने वाले बच्चे बाल श्रम कानूनों और सरकारी योजनाओं को मुंह चिढ़ाते नजर आ रहे हैं। ताजा हाउस होल्ड सर्वे को सही मानें तो इस समय पूरे जनपद में छह से 14 आयु वर्ग के पांच सौ बच्चे विद्यालय जाने की बजाय पेट की भूख शांत करने में लगे हैं। इसमें 242 लड़कियां और 258 लड़के शामिल हैं।
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सर्वे इस बात का खुलासा भी हुआ कि 359 बच्चों ने तो कभी विद्यालयों का मुंह तक नहीं देखा, जबकि 141 ने बीच में स्कूल छोड़ दिया। 210 बच्चे अपने ही घर के कार्यों में लगे पाए गए हैं। जबकि परिवार का पेट पालन के लिए 83 बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। शिक्षक का व्यवहार सही नहीं होने के कारण तीन बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया है तो 34 की पढ़ाई में गरीबी बाधा बन गई। शेष होटल, ढाबे में काम करने और विद्यालय दूर होने के चलते स्कूली शिक्षा से कोसों दूर हैं। ऐसे बच्चे खतरों से खेलते हुए अपना और परिवार का पेट पाल रहे हैं। बच्चों की शिक्षा और पुनर्वास हेतु सरकार ने योजनाएं तो कई संचालित की हैं, लेकिन उनका सही कार्यान्वयन नहीं हो पा रहा है। जबकि शासनादेश के अनुसार मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स यह सुनिश्चित करती है कि बाल श्रमिक के परिवार के एक सक्षम वयस्क बेरोजगार व्यक्ति को सूची प्राप्त होने के एक माह के अंदर शासन की विभिन्न योजनाओं खासकर रोजगार परक योजनाओं से आच्छादित करना होता है।

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