पर्यावरण की रक्षा को बनाया लक्ष्य

Chandauli Updated Wed, 08 Aug 2012 12:00 PM IST
चकिया। आजादी के 65 वर्ष बाद भी अंधाधुंध विकास की नई अवधारणा ने जहां प्रकृति के तमाम अवयवों को नुकसान पहुंचाया है। वहीं बढ़ती आबादी ने जंगलों की हरियाली पर भी ग्रहण लगा दिया है। इन विसंगतियों के बावजूद पर्यावरण संरक्षण काअलख जगाने वालों की कमी नहीं है, जो सिर्फ नाराें से ही नहीं अपने काम से भी पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे हैं। इनमें से एक नाम कटवामाफी (शहाबगंज) के परशुराम सिंह का भी है। जिनकी उपलब्धियों पर वन विभाग ने उन्हें वृक्ष बंधु की उपाधि से नवाजा है।
भगवान परशुराम के आदर्शों को हमेशा से आत्मसात करने वाले परशुराम सिंह सिर्फ पर्यावरणीय संरक्षण पर ही नहीं अपितु वैचारिक प्रदूषण को दूर करने की अलख जगातेे हैं। वृक्षों से उनका बचपन से ही लगाव रहा है। इसलिए उन्होंने वृक्षारोपण की दिशा में स्वयं कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्हाेंने अब तक 20 हजार वृक्षों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर स्थापित किया है। संत विद सरिता अरूधरनी की थ्योरी को आत्मसात करने वाले परशुराम सिंह आध्यात्मिक चिंतन, सामाजिक चिंतन पर भी जोर देते हैं। वैचारिक प्रदूषण को दूर करने में आध्यात्मिकता का सहारा लेने की वकालत करते हैं। अखिल भारतीय ब्रह्मर्षि महासंघ के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य और पदाधिकारी बन चुके परशुराम सिंह संतो के आदर्शों को स्थापित करने तथा वृक्षों, नदियाें, पर्वतों की रक्षा करने के साथ ही धरती, वायु, जल को प्रदूषित होने से बचाने के लिए सतत अलख जगा रहे हैं। वन विभाग या किसी भी स्वयं सेवी संस्था द्वारा जनपद के हर हिस्से में आयोजित संगोष्ठियों में वे पर्यावरणीय प्रदूषण के साथ वैचारिक प्रदूषण को दूर करने तथा जरूरत पड़ने पर दंड के प्रावधान को भी वरीयता देते हैं।

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