घर में ही रिफ्यूजी जैसे हैं बाढ़ पीड़ित

Chandauli Updated Mon, 30 Jul 2012 12:00 PM IST
चंदौली। बाढ़ की विभिषिका में ढहे कच्चे पक्के मकानों की कीमत 15 सौ रुपये लगाकर प्रशासनिक अधिकारी तो चुप बैठ गए, लेकिन उनके आशियाने पर इस कीमत में एक वर्ष बाद भी प्लास्टिक का तिरपाल तक नसीब नही हुआ। जी हां, पिछले वर्ष आई बाढ़ में हुए नुकसान का उचित मुआवजा आज तक पीड़ित परिवारों को नहीं मिल पाया है। इसका खामियाजा आज भी बाढ़ से प्रभावित कई गांवों के बाशिंदे भुगतने को विवश हैं।
कल तक जिन घरों में उनका परिवार गुजर बसर करता था, आज उन्हीं जमीनों पर वे घास फूस का छप्पर डालकर खानाबदोशों की तरह समय काटने को मजबूर हैं।
उल्ल्ेाखनीय हैं कि वर्ष 2011 के सितंबर में आई बाढ़ में जनपद के कई इलाकों में हजारों लोगाें का कच्चा पक्का मकान जमींदोज हो गया था। शासन द्वारा पीड़ित परिवारों का पुनर्वास करने के लिये कोई ठोस उपाय नहीं किया गया। मुआवजे के नाम पर पीड़िताें को महज कुछ रुपये देकर आंसू पोंछने का काम किया गया था। इसका परिणाम हुआ कि आज भी ऐसे परिवारों के मकान नहीं बन पाये हैं। सदर विकास खंड की खुरूहुंजा ग्राम पंचायत के अन्तर्गत आने वाले बरउर मौजें में गड़ई नदी में आई भयंकर बाढ़ में लगभग 146 लोगों के कच्चे मकान पूरी तरह से ध्वस्त हो गये थे। तब जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को इंदिरा आवास देने का वायदा कर तात्कालिक सहायता के नाम पर महज 1500 रुपये दिये थे। बताते चलें कि इनमें कई ऐसे गरीब परिवार हैं जिनके मकान आज तक नहीं बन पाये। बाढ़ पीड़ितों का आरोप है कि शासन द्वारा इंदिरा आवास देने का वादा आज तक पूरा नही किया गया। इसकी वजह से वे जैसे तैसे रहने को विवश हैं। ऐसी ही पीड़ा इसी विकास क्षेत्र के बजहां ग्राम पंचायत के मौजा परमानन्दपुर गंाव की है। जहां दर्जनों लोगों के कच्चे मकान बाढ़ की भेंट चढ़ गये है। वहां भी ऐसे परिवारों को 1500 रुपये की आर्थिक सहायता देकर पल्ला झाड़ लिया गया है।
नियामताबाद संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के रोहणा गांव में दस माह पूर्व अचानक आई बाढ़ में अपना आशियाना और फसल गंवाने वाले ग्रामीणों को अहेतुक सहायता राशि का मरहम लगाना तक प्रशासन ने उचित नहीं समझा। गौरतलब है कि गत वर्ष सितंबर माह में अचानक आई बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई की गांव के कई बाशिंदे बेघर हो गए। जिला प्रशासन द्वारा इनको 1500 रुपये अहेतुक सहायता राशि का चेक बांटा भी गया तो आधा अधूरा। इससे आज भी गांव के कई लोग वंचित रह गए।
गांव के पूर्व प्रधान छोटेलाल बिंद ने कहा कि कई बार जिलाधिकारी से मिलकर गरीबों के आवास की मांग की गई। आवास तो दूर जिला प्रशासन ने इनको अहेतुक राशि भी देना मुनासिब नहीं समझा। ग्राम प्रधान चंद्रमा प्रसाद ने कहा कि यहां के बाढ़ पीड़ितों के मदद के लिए जिला प्रशासन से कई बार आग्रह के बाद भी मदद के नाम पर सिर्फ 1500 रुपये का चेक बांटा गया, वह भी सबको नहीं मिला।

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