परमात्मा प्राप्ति को भजन अनिवार्य

Chandauli Updated Thu, 19 Jul 2012 12:00 PM IST
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पड़ाव। क्षेत्र के कटेसर गांव स्थित गंगा के किनारे पहुंचे विश्व गुरु से विभूषित स्वामी अड़गड़ानंद ने भक्तों को अशीर्वचन दिया। इस दौरान कटेसर आश्रम पर त्रिशूल पूजा व भंडारे का भी आयोजन किया गया। स्वामी जी के आगमन को लेकर वाराणसी व चंदौली के भक्तों का रेला उमड़ पड़ा।
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इस अवसर पर परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद जी ने कहा कि भगवान को पाने के लिए एक परमात्मा का भजन अनिवार्य है। इसके लिए भक्ति मीरा की होनी चाहिए। जिस तरह मीरा ने भगवान को पाने के लिए नौलखा हार को फेंक हाथ में मजीरा थाम प्रभु की भक्ति में लीन हो गई उसी तरह भगवान को पाने के लिए मन में लगन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सदगुरु परमात्मा तक की दूरी तय कराते हैं और उस राह पर भक्तों को चला देते हैं। सदगुरु के द्वारा ही भजन हृदय में जागृत होती है। इस दौरान उन्होंने भक्ति के बाबत कहा कि प्रथम भक्ति संतों के संगत से होती है उसके बाद भगवान के सत्संग से भक्ति प्रगाढ़ होती है। कहा कि भजन करने के लिए शरीर को जगाना पड़ता है और हृदय में अपने सदगुरु का स्वरुप पकड़ना चाहिए। जिस दिन सदगुरु का स्वरुप पकड़ में आ गई समझो भजन वहीं से प्रारंभ हो गया। उन्होंने भक्तों से एक परमात्मा की पूजा और उनके परिचायक नाम की जप करने पर बल दिया और यथार्थ गीता का घर घर में पाठ करने के लिए प्रेरित किया। इसके पूर्व स्वामी जी के आगमन की खबर लगते ही कटेसर गांव में गंगा के किनारे भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। प्रबचन व दर्शन के बाद भक्तों ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
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