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...और अब वाराणसी हुआ पचास किलोमीटर दूर

Chandauli Updated Sun, 17 Jun 2012 12:00 PM IST
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टांडाकला। अगर आप बलुआ घाट की तरफ से वाराणसी जाने का मन बना रहे हैं तो कृपया अपने कदम थाम लें। क्योंकि, बरसात की आहट मिलने के साथ ही प्रतिवर्ष होने वाली सरकारी कायावद यानी 15 जून की मध्यरात्रि से गंगा पर बने पीपे के पुल को तोड़ने का कार्य शुरू किया जा चुका है। और इसी के साथ अब क्षेत्र से वाराणसी की दूरी 25 किलोमीटर से बढ़कर 50 किलोमीटर हो गई है। पीपे के पुल को तोड़ दिए जाने से अब क्षेत्रीय नागरिक सहित गाजीपुर, जमानियां तथा बक्सर के यात्रियों को घूमकर पड़ाव स्थित मालवीय पुल का सहारा लेना पड़ेगा। जिसमें समय के साथ ही ईंधन, श्रम और पैसे भी अधिक लगेंगे।
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गौरतलब है कि मानसून की आहट मिलने लगी है, उम्मीद है कि अगले एक हफ्ते के भीतर ही पूर्वांचल की मिट्टी भी बरसाती फुहारों से गीली हो जाए। इसी के साथ ही हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 15 जून की मध्यरात्रि से बलुआ घाट पर बने पीपे के चह को तोड़ने का कार्य प्रशासन द्वारा शुरू करा दिया गया है। जो अब पांच माह बाद यानी नवंबर माह के प्रथम सप्ताह में दुबारा जोड़कर चालू होगा। पीपे का पुल टूट जाने के चलते इस मार्ग के जरिए वाराणसी जाने वाले यात्रियों के लिए अब वाराणसी की दूरी दोगुनी हो जाएगी। साथ ही इस मार्ग से प्रतिदिन वाराणसी जाने वाले तकरीबन पांच हजार यात्री भी अब 25 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय कर वाराणसी पहुंच सकेंगे। वहीं इस पुल को दुबरा शुरू होने में अब छह माह का इंतेजार करना होगा। छह माह बाद उक्त पीपे केपुल को नवंबर के प्रथम सप्ताह में बना दिया जाता है। बता दें कि इस पुल के जरिए प्रतिदिन जमनिया, बक्सर, गाजीपुर आदि जिलों के लोग वाराणसी तक की दूरी तय करते हैं।
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