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खुर्राट दारोगा नहीं इथिकल हैकर ही लड़ सकते हैं जंग

Chandauli Updated Thu, 14 Jun 2012 12:00 PM IST
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मुगलसराय। सूबे में दिन प्रतिदिन बढ़ रहे साइबर क्राइम पर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस महानिदेशक एसी शर्मा ने भले ही वाराणसी की मीटिंग में हर जोन को एक साइबर थाने का तोहफा देने की बात कही हो, मगर जानकारों की मानें तो मौजूद पुलिसिया ढांचे में साइबर क्राइम से लड़ने वाले हथियार नाकाफी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पुलिस महकमे के भीतर न तो दक्ष इथिकल हैकरों की टीम है और न ही साइबर क्राइम से निपटने की सही तकनीकी। विशेषज्ञ तो यहां तक कहते हैं कि महकमे को जेननेक्स्ट क्राइम से निपटने के लिए खुर्राट दारोगाओं की नहीं बल्कि कंप्यूटर की रफ्तार संग चलने वाले दिमागी सूरमाओं की जरूरत है। नई टेकभनालाजी के साथ ही दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहे साइबर क्राइम को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2000 में इन्फारमेशन टेकभनालजी एक्ट लागू कर अपराध से लड़ने की अपनी मंशा तो जाहिर कर दी थी लेकिन ग्यारह वर्ष के बाद भी देश के कई राज्य इन अपराधों के सामने घुटने के बल रेंगते ही नजर आते हैं। सूबे में नई सरकार बनने के बाद मंडलवार समीक्षा के दौरान वाराणसी में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एसी शर्मा ने साइबर अपराधों पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। जबकि आलम यह है कि मौजूदा दौर में थानों में लगे अधिकांश कंप्यूटर दक्ष आपरेटरों के अभाव में धूल फांक रहे हैं। ऐसे में साइबर वर्ल्ड के दिग्गज क्रैकरों की टीम से महकमा कैसे लड़ेगा यह सबसे बड़ी चिंता का विषय है। अंतरराष्ट्रीय गिरोहों द्वारा पोर्नोग्राफी जैसे जटिल साइबर क्राइम के मामले में यूपी पुलिस के जवान पहले ही हाथ खड़े कर दें तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
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