भ्रांतियों में बढ़ रही मोर के मांस की लोकप्रियता

Chandauli Updated Wed, 16 May 2012 12:00 PM IST
चकिया। राष्ट्रीय पक्षी मोर का शिकार करने की परिपाटी भ्रांतियों के चलते काशी वन्यजीव प्रभाग में जोर पकड़ रही है। इससे वन विभाग के सामने नई तरह की परेशानी खड़ी हो गई है। वैसे वन्यजीवों के शिकार पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में संशोधनों के चलते ब्रेक लगा है।
काशी वन्यजीव प्रभाग के चंद्रप्रभा वन्यजीव विहार के गर्दी बीट में मोर के कुनबे को मारकर खाने के प्रकरण में भले ही राष्ट्रीय पक्षी का शिकार करने वाले शिकारियों पर मुकदमा दर्ज करा दिया हो लेकिन मोर के शिकार की प्रवृत्ति वनवासियों में बढ़ने से वन विभाग के सामने अलग तरह की परेशानी खड़ी हो गई है। अब उसे वन्यजीवों के साथ ही मोर सहित विलुप्त हो रही पक्षियों की प्रजातियों को बचाने की दिशा में अग्रसर होना पड़ेगा। जो कर्मचारियों की कम संख्या को देखते हुए अत्यंत कठिन दिखता है। बता दें कि मोर और उसके बच्चों को काटकर खाने को वन विभाग चिकित्सीय भ्रांतियों से भी जोड़कर देख रहा है। चंद्रप्रभा वन्यजीव विहार के केयरटेकर तथा चंद्रप्रभा रेंजर अनिल कुमार पांडेय कहते हैं कि मोर के शिकार को कामोत्तेजक मानने की भ्रांति के कारण मोर का शिकार खाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिसका कोई मेडिकल बेस नहीं है। लेकिन इन भ्रांतियों की वजह से राष्ट्रीय पक्षी के अस्तित्व पर ही संकट पैदा होने लगा है।
वहीं मोर के शिकार की खबर पर चकिया आए काशी वन्यजीव प्रभाग के उपप्रभागीय वनाधिकारी रामअवतार सिंह कहते हैं कि वन प्रभाग में मोर के शिकार करने तथा उसे खाने के प्रयास की यह पहली घटना है। जिसका कयास लगाने में वनविभाग विफल रहा है। लेकिन इस प्रकरण के सामने आने पर अब विभाग इस दिशा में भी सक्रिय होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पक्षी का शिकार आपराधिक घटना है इसके दोषियों को हर हाल में दंड दिया जाएगा।

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