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निजी अस्पतालों पर ताले, सरकारी पर भीड़

ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Wed, 07 Jun 2017 12:06 AM IST
अस्पताल
अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की देशव्यापी हड़ताल के आह्वान पर जिलेभर के सभी प्राइवेट अस्पतालों पर ताले लटके रहे। प्राइवेट अस्पताल संचालकों ने अस्पतालों को बंद रखा। आईएमए की हड़ताल से बड़ी संख्या में मरीजों को परेशानी हुई। लोगों ने सरकारी अस्पतालों का रुख किया, जिससे जिलेभर के सरकारी अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या में काफी वृद्धि हो गई।

आईएमए के डॉ. एसएम अग्रवाल ने बताया कि चिकित्सकों के साथ मारपीट और अस्पतालों में तोड़फोड़ के विरोध में देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया था। मंगलवार को आईएमए के दिल्ली कूच के आह्वान पर जिलेभर के चिकित्सक  दिल्ली राजघाट पहुंचे और केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन देकर विरोध जताया।

दिल्ली जाने वालों में डॉ. प्रदीप मलिक, डॉ. संजीव यादव, डॉ. एसके गर्ग, डॉ. वीरेंद्र कुमार, डॉ. संजीव अग्रवाल, डॉ. पंकज अग्रवाल, डॉ. यतेंद्र शर्मा, डॉ. डीके शर्मा, डॉ. नरेंद्र चौहान आदि शामिल रहे। वहीं सीएमओ डॉ. केएन तिवारी ने बताया कि आईएमए की हड़ताल से सरकारी अस्पतालों की ओपीडी काफी बढ़ गई, लेकिन डॉक्टरों की सक्रियता से मरीजों को ज्यादा दिक्कत नहीं हुई।

अस्पताल के प्रमुख डाक्टरों ने ली छुट्टी
आपातकालीन स्थिति में भी जिला अस्पताल के दो चिकित्सक अवकाश पर चले गए। बाल रोग विशेषज्ञ एवं ईएनटी चिकित्सकों के अवकाश लेने पर सीएमएस डा. राज कुमार ने कहा कि दोनों चिकित्सकों को जरूरी कार्य होगा इसलिए अवकाश लिया होगा।

अस्पताल मे बच्चे-महिला की मौत, तोड़फोड़
बुलंदशहर/सिकंदराबाद (ब्यूरो)। जिला अस्पताल में मासूम की मौत से खफा तिमारदारों ने चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही और लेटलतीफी का आरोप लगाकर हंगामा किया। उधर, सिकंदराबाद में भी उपचार के दौरान महिला की मौत से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की। अस्पताल कर्मचारियों ने भी पीड़ित परिजनों के साथ मारपीट की। पीड़ित ने नामजद तहरीर दी है।


सिकंदराबाद के पितोबास निवासी शहजाद के बच्चे समील (1.5) की तबीयत बिगड़ गई। उसे परिजन जिला अस्पताल ले आए, जहां समील की मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर की लापरवाही से बच्चे की मौत होना बताते हुए हंगामा िकया। सीएमएस डॉ. राज कुमार ने बताया कि जिस समय बच्चा अस्पताल में पहुंचा उसकी मौत हो चुकी थी।

वहीं, इमरजेंसी में तैनात कर्मचारियों का कहना है कि इमरजेंसी में बच्चा जिंदा था। उधर, नगर के चौधरीवाडा निवासी पप्पू सैनी ने बताया कि उसकी पत्नी सुशीला को पेट दर्द की शिकायत थी। उसने उसे एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। दोपहर बाद सुशीला की हालत अचानक बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।

परिजनों ने चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाकर अस्पताल में हंगामा कर तोड़फोड़ की। सुशीला को गंभीर हालत में उनके अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने उसे बचाने का पूरा प्रयास किया। लेकिन वह उसे को नहीं बचा सके। मृतका के परिजनों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की। शीशे में हाथ मारकर खुद को घायल किया। उन्होंने, अस्पताल के किसी भी स्टॉफ ने उसके साथ मारपीट नहीं की।-प्रबंधक डा. काली चरण गुप्ता।

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