6.44 लाख क्विंटल गेहूं खराब

Bulandshahr Updated Tue, 02 Jul 2013 05:31 AM IST
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बुलंदशहर। भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में पिछले साल स्टोर किए गए 12.88 लाख मीट्रिक टन गेहूं में से 6.44 लाख क्विंटल गेहूं अव्यवस्था के कारण खराब हो गया। बुलंदशहर एफसीआई प्रबंधन भी इस बात को स्वीकार रहा है। बुलंदशहर स्थित एफसीआई गोदामों में पिछले साल 12.88 लाख मीट्रिक टन (एमटी) गेहूं भंडारित हुआ था। चांदपुर रोड स्थित निगम के गोदाम में 25 हजार एमटी, सिकंदराबाद के लालपुर गोदाम पर 85 हजार एमटी, नई मंडी 18 हजार एमटी, इमलिया 15840 एमटी और श्यामनगर गोदाम में करीब 12 हजार एमटी गेहूं का भंडारण किया गया था। एफसीआई प्रबंधन के मुताबिक भंडारित गेहूं में से 0.5 प्रतिशत खराब हो गया। गेहूं खराब होने की वजह सामान्य से अधिक नमी, कीट और जानवरों के प्रकोप के अलावा भंडारण करते समय गेहूं की बर्बादी बताई गई है।
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25.27 लाख लोगों की खुराक खराब
सीएमओ डा. दीपक ओहरी के मुताबिक एक दिन में न्यूनतम 1,600 कैलोरी ऊर्जा जरूरी होती है। 250 ग्राम गेहूं से करीब 1000 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। शेष 600 कैलोरी वसा आदि से पूरी होती है। 0.5 प्रतिशत क्षति के आंकड़े के हिसाब से करीब 6.44 लाख किलो गेहूं खराब हुआ। यानी 6.44 लाख किलो गेहूं 25.27 लाख लोगों की एक दिन की खुराक थी।
हर साल होता है सर्वे
सरकारी गोदामाें में खराब गेहूं का सच जानने के लिए एफसीआई प्रबंधन गेहूं की स्थिति का माहवार जायजा लेता है। खराब और सुरक्षित अनाज की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाती है। भंडारण प्रभारी के मुताबिक 6-7 माह में भंडारित एक क्विंटल गेहूं में 600-700 ग्राम का इजाफा हो जाता है। खराब गेहूं की पूर्ति गेन गेहूं से कर ली जाती है, जबकि कृषि वैज्ञानिक इस तर्क को नकार रहे हैं। ढकने की व्यवस्था न होने से लालपुर गोदाम पर गेहूं ज्यादा खराब हुआ था।
हरियाणा-पंजाब के गेहूं से भरेंगे गोदाम
बुलंदशहर। सूबे में गेहूं की खरीद कम होने से इस बार पंजाब और हरियाणा के गेहूं से एफसीआई के गोदामों को भरा जाएगा। सीजन बीता जा रहा और अभी तक महज पांच प्रतिशत से कम गेहूं गोदामों में पहुंचा है। बीते सीजन में बुलंदशहर स्थित चांदपुर रोड, सिकंदराबाद लालपुर, नई मंडी इमलिया और श्यामनगर गोदाम में करीब 12.88 लाख मीट्रिक टन गेहूं भंडारित किया गया था। सूत्रों का कहना है कि पंजाब और हरियाणा से जो गेेहूं गोदामों पर पहुंचा है उसकी गुणवत्ता यूपी के गेहूं से कम है। भंडारण प्रभारी योगेंद्र सिंह का कहना है कि पंजाब और हरियाणा से गेहूं आना शुरू हो चुका है।
खुले यार्डों में नुकसान अपेक्षाकृत अधिक होता है। कवर्ड गोदामों में सिर्फ बंदर, चूहा, कीट और पक्षी नुकसान पहुंचाते हैं। गहन निगरानी के बावजूद 0.5 प्रतिशत गेहूं खराब हो गया। खुले यार्डों को कवर करने के लिए सरकार को कई बार लिखा जा चुका है। हालांकि खराब हुए गेहूं की पूर्ति गेन गेहूं से की जाती है। - ज्ञानेंद्र सिंह, भंडारण प्रभारी, एफसीआई

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