दो साल का था तब से पकड़ा बल्ला

Bulandshahr Updated Mon, 10 Dec 2012 05:30 AM IST
बुलंदशहर। टीम इंडिया में शामिल होने वाले भुवनेश्वर को बचपन से ही कि्रकेट का शौक था। जब वह दो साल का था तो बल्ला पकड़ लिया था। वह घर में ही कि्रकेट खेलने लगता था। मां खूब फटकारतीं थी। लेकिन वह नहीं मानता था।
बुलंदशहर से सटे लुहारली गांव में रहने वाले भुवनेश्वर के ताऊ कृपाल सिंह ने बताया कि जब भुवनेश्वर दो साल का था तभी से उसने बल्ला थाम लिया था। वो बल्ले से सड़क पर पड़ी हर चीज पर शाट लगाता और खुश होता। गांव वाले कई बार इसका विरोध करते थे। लेकिन आज उसके टीम इंडिया में चयन से वह भी खुशी से झूम उठे हैं। फिलहाल बुलंदशहर में ऐसी कई प्रतिभाएं हैं जो सुविधाओं के अभाव में आगे नहीं बढ़ पाती हैं। जनपद में क्रिकेट के नाम पर कुछ नहीं है। खेल विभाग ने स्टेडियम में पिच बनवाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। युवा कल्याण विभाग आठ साल से गांवों में खेल मैदान तक की व्यवस्था नहीं करा पाया है। अधिकारियों के आठ साल से बार-बार लिखने के बावजूद कोच की व्यवस्था नहीं हो पाई है।

2005 में शुरू हुआ सफर
ट्रांसलेम एकेडमी से भुवी की स्कूलिंग हुई है। पहले वह स्कूल में क्रिकेट खेलता था। 2005 में भुवी ने विक्टोरिया पार्क क्रिकेट एकेडमी में प्रशिक्षण के लिए प्रवेश किया। दो साल के गहन प्रशिक्षण एवं मेहनत के बल पर वह यूपी की अंडर-16 टीम का सदस्य बन गया।

लुहारली गांव में खुशी की लहर
भुवनेश्वर कुमार के चयन से बुलंदशहर में खुशी की लहर दौड़ गई है। शहर से सटे लुहारली गांव निवासी पुलिस इंस्पेक्टर किरनपाल सिंह का इकलौता पुत्र भुवनेश्वर का टीम इंडिया में चयन से परिजनों को बधाई देने वालों का तांता लगा है। पिता किरणपाल सिंह यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं और वर्तमान में बागपत एसपी के पीआरओ हैं। ताऊ के बेटे पुष्पेंद्र ने बताया कि भुवनेश्वर को बचपन से क्रिकेट खेलने का शौक रहा। ताऊ कृपाल सिंह ने बताया कि यह सफलता उसकी कड़ी मेहनत और लगन का नतीजा है।

भगवान! तेरा शुक्रिया
ओ भगवान! तेरा लाख-लाख शुक्रिया। ये वो शब्द हैं, जो बेटे भुवनेश्वर कुमार (भुवी) के टीम इंडिया में चयन की सूचना पर उनके पिता किरणपाल सिंह के मुंह से निकले। खुशी के मारे मोबाइल फोन हाथ से छूटने लगा और आंखों से आंसू बहने लगे। कहा कि एक बेटे का अपने पिता केेेेेे लिए इससे अच्छा तोहफा और क्या हो सकता है।

मां बोली, सिर हो गया ऊंचा
भुवनेश कुमार की मां इंद्ररेश देवी के आंखों से खुशी के आंसू टपक पड़े। उन्होंने कहा कि बेटे की कामयाबी ने सिर ऊंचा कर दिया है। पढ़ाई से ज्यादा क्रिकेट में ध्यान देने पर मां इंद्रेश भुवी को डांट देती थी। इसके बाद भुवी चुप हो जाता था और कहता था कि मां बस थोड़ी देर खेलकर आ जाऊंगा।

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