महविश ने अफसरों को भेजी हाईकोर्ट के आदेश की प्रति

Bulandshahr Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
बुलंदशहर। अब्दुल हकीम की मौत को ऑनर किलिंग से भले ही पुलिस प्रशासन इंकार कर रहा हो, लेकिन महविश इसको मानने को तैयार नहीं है। अफसरों को उसने हाईकोर्ट का वह आदेश भेजा है, जिसमें हकीम को अपहरण के केस में राहत मिली थी और सुरक्षा के निर्देश दिए गए थे। जबकि पुलिस हाईकोर्ट के आदेशों के संबंध में इंकार करती रही है। अगर कोर्ट के आदेश को पुलिस गंभीरता से लेती तो हकीम की हत्या नहीं होती।
महविश और अब्दुल हकीम के परिजनों ने बताया कि प्रेमी युगल के गांव से फरार होने के बाद शहरुख ने उनके खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। जो परिजन मुकदमे में नामजद नहीं थे, उनका भी पुलिस उत्पीड़न कर रही थी। परिजनों को अवैध हिरासत में रखकर उन्हें यातनाएं दी गईं थीं। महविश के बयान और उसके एक बेटी के मां बनने के बावजूद पुलिस ने अब्दुल हकीम और उसकी मां शकूरन के खिलाफ अपहरण के मुकदमे में चार्ज शीट कोर्ट में पेश कर दी थी। विवश होकर अब्दुल हकीम और महविश ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई। कोर्ट के आदेश के बाद ही पीड़ित परिवार को पुलिस ने बख्शा था, लेकिन आदेश के बावजूद महविश-हकीम को सुरक्षा प्रदान नहीं की। महविश और हकीम के परिजनों ने हाईकोर्ट के आदेश की प्रति अफसरों को भेजी है।

महविश के अपहरण के केस में तत्कालीन प्रभारी ने 2011 में ही चार्जशीट लगा दी थी। मेरी तैनाती यहां जुलाई 2012 में हुई है। मेरे पास हकीम के परिजन कोर्ट का आदेश लेकर नहीं आए।
राकेश कुमार, कोतवाली देहात प्रभारी

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