अब्दुल हकीम हत्याकांडः अढौली की पहली लव स्टोरी का दुखद अंजाम

Bulandshahr Updated Wed, 05 Dec 2012 05:30 AM IST
बुलंदशहर। अब्दुल हकीम की मौत को भले ही पुलिस-प्रशासन ऑनर किलिंग से इंकार कर रहा हो, लेकिन अढौली गांव की पहली प्रेम कहानी के किस्से हर जुबान पर है। सिकंदराबाद मार्ग स्थित अढौली गांव की हकीम-महविश की पहली लव स्टोरी है। यहां इससे पहले किसी ने प्यार नहीं किया। अगर किया भी तो सामने आने की हिमाकत नहीं दिखाई। अढौली की इस परंपरा को अब्दुल हकीम और महविश ने तोड़ा और गांव से भागकर शादी कर ली। जब तक गांव नहीं लौटे तब तक उनकी जिंदगी आबाद रही। लेकिन अचानक डेढ़ साल बाद गांव लौटते ही प्रेम दीवानों की हंसती खेलती दुनियां उजड़ गई। सबकी जुबान पर बस एक ही सवाल है कि हकीम-महविश की मोहब्बत को किसकी नजर लग गई। हकीम की हत्या के बाद महविश अकेली पड़ गई है। लेकिन शौहर के हत्यारों को सजा दिलाने की लड़ाई जारी है। दोनों के परिजनों की मानें तो इसके जिम्मेदार मोहब्बत के दुश्मन हैं।

यूं शुरू हुआ प्रेम का रास्ता
अब्दुल हकीम और महविश के घर अढौली गांव में बिल्कुल बराबर हैं। जब महविश कक्षा छह में थी, तब अब्दुल कक्षा आठ में था। दोनों पास के गांव अकबरपुर स्थित स्कूल एक साथ जाते थे। यहीं से दोनों की दोस्ती शुरू हुई। आठवीं में पढ़ने के दौरान परिजनों को दोनों की दोस्ती की भनक लगी और परिजनों ने महविश को घर बैठा दिया। हकीम नगर के मुस्लिम इंटर कालेज में पढ़ने लगा। हकीम और महविश का मिलना मुश्किल हो गया था। इसी बीच परिजनों ने महविश का रिश्ता तय कर दिया। 11 नवंबर 2010 को उसका निकाह होना था। 29 अक्तूबर रात साढ़े आठ बजे दोनों घर से फरार हो गए।

मुसीबत का अटूट सफर
घर छोड़ने के बाद हकीम और महविश मेरठ चले गए और 11 नवंबर 2010 को महविश से निकाह कर लिया। महविश की मानें तो उनके फरार होने के बाद उसके परिजनों और पुलिस ने हकीम के परिजनों पर काफी जुल्फ ढाए। पंचायत ने भी दोनों को मौत का फरमान सुना दिया। पूरे परिवार को पलायन के लिए विवश होना पड़ा। इस दौरान प्रेम दीवानों ने 48 बार विभिन्न अधिकारियों और शासन को मदद के लिए पत्र लिखे। महविश के गर्भवती होने पर हकीम उसे पड़ोसी गांव भाटगढ़ी छोड़ गया। 22 नवंबर को हकीम की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद अब महविश अपने पति के हत्यारोपियों को सख्त सजा दिलाने के लिए संघर्ष कर रही है। महविश हकीम की मौत को ऑनर किलिंग बता रही और पुलिस-प्रशासन मानने को तैयार नहीं है, लेकिन महविश का कहना है कि अब उसकी जिंदगी का मकसद प्यार के दुश्मनों को कड़ी सजा दिलाना है।

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