अब्दुल हकीम हत्याकांडः पंचायत में भी शामिल था चाचा

Bulandshahr Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
बुलंदशहर। मृतक हकीम के परिजनों द्वारा शासन को भेजी गई सीडी का समाचार ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित होने के बाद पुलिस महकमे में एक बार फिर हड़कंप मच गया। निजी चैनल के बयानों के आधार पर बनाई गई सीडी में शामिल महविश का चाचा प्रेमी युगल के फरार होने के बाद गांव में हुई पंचायत में भी शामिल हुआ था।
महविश ने बताया कि उसके मायके पक्ष के जिस चाचा ने निजी चैनल पर उसके फरार होने के बाद धमकी दी थी। वही चाचा गांव में हुई पंचायत में भी शामिल था। महविश और हकीम के फरार होने के बाद गांव में पंचायत हुई थी। इसमें गांव के 26 लोग शामिल थे। पंचायत में शामिल सभी 26 लोगों की सूची शनिवार को महविश ने राज्य मंत्री औैर अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष हाजी रियाज अहमद को सौंपी थी। रियाज अहमद ने महविश को भरोसा दिलाया था कि वह जांच कराएंगे और अगर पंचायत होने की पुष्टि होती है, तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। चाचा के धमकी भरे लहजे के बयान सामने आने से महविश और उसके परिजनों के गांव में पंचायत होने के दावे को बल मिल रहा है।

आमिर को सीएम के जवाब का इंतजार
बुलंदशहर। आमिर खान के रीयलिटी शो ‘सत्यमेव जयते’ की कोर डायरेक्टर स्वाति चक्रवर्ती नेे सोमवार को महविश को फोन कर उसका हाल जाना। स्वाति ने यह भी जानकारी ली कि कौन-कौन अधिकारी या राजनीतिज्ञ उससे मिलने पहुंचे हैं। स्वाति ने महविश से हाजी रियाज अहमद का भी फोन नंबर लिया। स्वाति ने बताया कि आमिर खान ने पत्र और रिकार्डिंग की सीडी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भेज दी है। अब सीएम के जवाब का इंतजार है। जवाब के बाद ही आगे की कार्यवाही तय की जाएगी।

शौहर की कब्र पर आंसू भी नहीं बहा पाएगी महविश!
बुलंदशहर। शौहर के इंतकाल के बाद अब महविश को हकीम की कब्र पर भी आंसू बहाने के लिए इजाजत लेनी पड़ेगी। गांवों के तुगलकी फरमान के कारण भाटगढ़ी के लोगों को पड़ोसी गांव में बने कब्रिस्तान में जाने की इजाजत नहीं है। इंतकाल के बाद दफनाने के लिए उस गांव के लोगों की मंजूरी जरूरी है। कब्रिस्तान पर अवैध कब्जा है। शासन के सख्त आदेश के बाद भी प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है।
अब्दुल हकीम के भाई मोहम्मद यूनुस ने बताया कि उनके वालिद अब्दुल हाफिज के इंतकाल के समय कब्रिस्तान में दफनाने को लेकर काफी विवाद हुआ था। जनाजे को पुलिस सुरक्षा में दफनाया गया था। उन्होेंने बताया कि भाटगढ़ी के लोगों को कब्रिस्तान में जाने की इजाजत नहीं हैं। इसके लिए परमिशन लेनी पड़ती है। भाटगढ़ी के लोगों ने जब इसका विरोध किया तो गांव के लोगों ने साफ कह दिया कि अपना कब्रिस्तान अलग बनाओ। ऐसे में परिवार के लोग हकीम की कब्र पर कैसे जाएंगे। गांव के जुनैद ने बताया कि पिछले 50 साल से चकबंदी नहीं हुई है। सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जा कर रखा है। कब्रिस्तान की जमीन पर चहारदीवारी नहीं है।
एसडीएम सदर संदीप कौर का कहना है कि कब्रिस्तान की चहारदीवारी के लिए लेखपाल से जांच कराई जाएगी। कब्रिस्तान में जाने के लिए यदि इजाजत लेनी पड़ती है तो यह गंभीर विषय है। इसकी जांच कर रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी।

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