महंगी जमीन, सस्ता खून

Bulandshahr Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
बुलंदशहर। अपना बुलंदशहर जैसे-जैसे विकास और विस्तार की राह पर आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे यहां रिश्तों की डोर कमजोर होती जा रही है। नोएडा और गाजियाबाद की तरह जमीनों के रेट बढ़ रहे हैं तो लोग संपत्तियों के लालच में अपनों का खून बहा रहे हैं। हत्याओं का ग्राफ ऊंचा हो रहा है। इसके बाद भी पुलिस आपसी विवादों को हल्के में ले रही है।
एक दशक पहले तक जिले में जमीन-संपति को लेकर इतनी मारामारी नहीं थी। ओर-छोर विस्तार लेकर नोएडा ने बुलंदशहर को छुआ तो अचानक बुलंदशहर में भी जमीनों के रेट आसमान छूने लगे। दिल्ली और पंजाब के बड़े किसानों ने गढ़मुक्तेश्वर पर नजरें जमाईं तो उसका असर भी सीधा बुलंदशहर की जमीनों पर पड़ा। उधर से अलीगढ़ में भी विस्तार की आंधी उठी तो उसका फायदा भी सीधा बुलंदशहर में जमीनों के रेट बढ़ने के रूप में सामने आया है। यही वजह है कि जिले में अब एक-एक बीघा जमीन को लेकर मारामारी मची दिखाई दे रही है।
जिला क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के मुताबिक, 1980 से 2005 तक बुलंदशहर में संपत्ति विवाद के 3268 और इसके कारण हत्याओं के 137 मामले हुए थे। 2005 से अब तक 6233 मामले सामने आए और इसके चलते 286 लोगों की हत्याएं भी हुईं।

रिश्तों का खून
2005 में सैदपुर में ग्राम प्रधान कृष्णपाल की हत्या जमीन की रंजिश में हुई। इसके बाद ही शुरू हुई जतन-सैंसर की खूनी रंजिश, जिसमेें एक साथ 12 लोगों की हत्या सहित 47 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा।
2005 में ही बुकलाना में खेत पर 3 लोगों को संपत्ति विवाद में फावड़े से काट डाला।
2006 में बुकलाना में बलजीत सिंह के उसके पुत्र ने गला रेतकर मार डाला, जबकि हाजीपुर में शैतान सिंह चौहान ने अपने भाई की हत्या कर दी।
जुलाई 2008 को बरारी में सुखवीर सिंह सहित परिवार के सभी सात लोगों को जमीन के विवाद में मौत के घाट उतार दिया।
2008 में अगौता में खेत पर खड़े मौसमी के पेड़ के विवाद में तीन लोगों की हत्या कर बिटोरे में जला दिए।
अगस्त 2008 में कुमरोहा में खेत के विवाद में दो लोगों की हत्या।
2008 में साठा में एक राजनीतिज्ञ को घर के विवाद में बेटे ने मार डाला।
2009 में चरौरा में बेटे ने पिता को कुल्हाड़ी से काटा।

गायब हो गए पुलिस के संपत्ति विवाद रजिस्टर
डीजीपी ने वर्ष 2010 में संपत्ति विवाद रजिस्टर अपडेट करने के आदेश दिए थे। इनमें संपत्तियों को लेकर चल रहे विवादों का रिकार्ड और कोर्ट में विचाराधीन विवादोें की प्रगति का ब्यौरा रखना था। प्रत्येक छह माह पर संपत्ति विवाद वाले दोनों पक्षों को पोस्टकार्ड डालकर शांति बनाए रखने के आदेश देने और साल में एक बार थाने बुलाकर समझाने/चेतावनी देने के आदेश थे। लेकिन पालन नहीं हो रहा है।

जागी पुलिस
बुलंदशहर के एसएसपी गुलाब सिंह का कहना है कि संपत्ति विवादों के मामले में पुलिस गंभीर है। जिले के सभी थानाध्यक्षों को संपत्ति विवाद के सभी मामलों की समीक्षा के आदेश दिए हैं। सभी पक्षों को बुलाकर हिदायत दी जाएगी।

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