भाजपा जिलाध्यक्ष चुनाव में हाथापाई

Bulandshahr Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
बुलंदशहर। भाजपा में जिला अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर शुक्रवार को दो गुटों में बवाल हुआ। इस दौरान नामांकन पर्चा फाडे़ गए और पार्टी कार्यालय पर बंदूकें लहराई गईं। हथियारों के बल पर वोटरों को धमकाने तक की कोशिश की गई। जिला चुनाव अधिकारी सहित पार्टी के तीन लोग इस हाथापाई और मारपीट में जख्मी हुए। एक पूर्व विधायक भी लपेटे में आ गए। जिला चुनाव अधिकारी ने घटना की निंदा की है और रिपोर्ट हाईकमान को भेजी है। इस पूरे प्रकरण में डीके शर्मा का चुना जाना तय है, सिर्फ घोषणा बाकी है। विनर प्रत्याशी की घोषणा लखनऊ से प्रदेश चुनाव अधिकारी करेंगे।
भाजपा के जिला पार्टी कार्यालय पर शुक्रवार को सुबह से ही जिला अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर माहौल गर्म था। जिला अध्यक्ष पद के लिए मौजूदा जिला संयोजक डीके शर्मा और स्याना से विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी रहे वीरेंद्र राणा ने नामांकन किया। शर्त के मुताबिक दोनों के आवेदन पर 14-14 प्रस्तावक होने चाहिए। दोपहर करीब तीन बजे पार्टी कार्यकर्ताओं में एक-दूसरे पर धांधली और साठगांठ के आरोप प्रत्यारोप लगते रहे। इसी बीच पार्टी कार्यालय पर बवाल शुरू हो गया। कुछ लोगों ने जिला चुनाव अधिकारी से पर्चे छीनकर फाड़ दिया। इसके बाद दोनों गुटों में हाथापाई और मारपीट शुरू हो गई। जिसमें जिला चुनाव अधिकारी नरेंद्र सिंह, गिरिराज सिंह, जयप्रकाश गुप्ता को मामूली चोट आई हैं। पूर्व विधायक शिकारपुर महेंद्र बाल्मीकि से भी अभद्रता की गई।

रामअवतार राघव के प्रस्ताव को लेकर बिगड़ी बात
पूर्व जिला महामंत्री जय प्रकाश शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को जिला अध्यक्ष के एक पद और प्रांतीय परिषद के सात पदों को लेकर चुनाव होना था। प्रांतीय परिषद के लिए 12 नामांकन फार्म लिए गए। 11 फार्म ही जमा हो सके। 11 फार्म में से एक फार्म निरस्त कर दिया गया। उन्हाेंने बताया कि मंडलाध्यक्ष रामअवतार राघव भी प्रस्तावक थे। राम अवतार राघव ने यह लिखकर दिया कि वो किसी के साथ नहीं हैं। इसी को लेकर डीके शर्मा और वीरेंद्र राणा गुट के बीच बात बिगड़ गई।

पहली बार नहीं पार्टी में गुटबाजी
भाजपा में जिला स्तर पर गुटबाजी पहली बार नहीं हुई है। जिला अध्यक्ष पद को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. छत्रपाल, पूर्व कारागार मंत्री वीरेंद्र सिरोही और पूर्व एमएलसी सतीश शर्मा एक खेमे में नजर आए। वीरेंद्र राणा के लिए तीनों ने पार्टी के पदाधिकारियों से वोट मांगे। डीके शर्मा पर एक पार्टी के बड़े पदाधिकारी और एक पूर्व मुख्यमंत्री का आशीर्वाद मिला हुआ था। इसको लेकर पार्टी में गुटबाजी खुलकर सामने आई है।

जयप्रकाश कौन, गुप्ता या शर्मा
छत्रपाल सिंंह किस जयप्रकाश की बात कर रहे है। शर्मा या गुप्ता। जयप्रकाश गुप्ता का कहना है कि वह डीके शर्मा के साथ हैं। एक जयप्रकाश शर्मा प्रांतीय परिषद के प्रत्याशी पूर्व सांसद पक्ष से थे। दोनों दावा कर रहे हैं कि जयप्रकाश का समर्थन हमें हासिल था। एक गुप्ता और एक शर्मा को अपना बता रहे हैं।

एलआईयू ने पहले ही हिंसा की आशंका जताई
बुलंदशहर। जिलाध्यक्ष पद को लेकर भाजपा पहले सही दो गुटों में बंट चुकी थी। गुटबाजी और पदाधिकारियों में आपसी लड़ाई लगातार बढ़ती गई। लोकल इंटेलीजेंस ने पहले ही हिंसा होने की संभावना जताई और शासन को रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट में कहा गया है कि जीत के लिए पार्टी के बड़े नेताओं में हर हथकंडे आजमाए जा रहे हैं। चुनाव के समय माहौल बिगड़ जाने की संभावना व्यक्त की गई। एलआईयू ने शासन को इस हिंसा के संबंध में दो दिन पहले ही रिपोर्ट भेजी थी।

अराजकता फैलाने की कोशिश
घटना पार्टी के लिए निंदनीय है। इसकी शिकायत हाईकमान से की जा चुकी है। चुनाव के समय हथियारों का प्रदर्शन किया गया। अराजकता फैलाने की कोशिश की गई। कार्यकर्ताओं की तरफ से अभद्रता की गई। चुनाव में डीके शर्मा को 14 और वीरेंद्र राणा को 13 प्रस्तावकों का समर्थन मिला है। शर्त पूरी नहीं होने पर वीरेंद्र सिंह का पर्चा स्वत: खारिज हो गया। एक मात्र डीके शर्मा का पर्चा बचा। विनर प्रत्याशी की घोषणा प्रदेश चुनाव अधिकारी द्वारा की जाएगी। सारी रिपोर्ट प्रदेश चुनाव अधिकारी को भेजी गई है।
नरेंद्र सिंह, प्रांतीय महामंत्री और जिला चुनाव अधिकारी भाजपा

डीके शर्मा पक्ष के लोगों ने विवाद किया। वह वीरेंद्र सिंह की जीत को देखते हुए बौखला गए थे। डीके शर्मा पक्ष के जयप्रकाश आखिरी वक्त में वीरेंद्र सिंह के पक्ष में हो गए थे। दूसरा पक्ष यह बर्दाश्त नहीं कर सका। इसलिए विवाद हुआ।
डा. क्षत्रपाल सिंह, पूर्व मंत्री एवं सांसद

एक प्रस्तावक के मना करने से वीरेंद्र सिंह के तेरह प्रस्तावक रह गए थे। इस आधार पर पर्चा खारिज किया गया। इसे लेकर बवाल हुआ। चुनाव अधिकारी और पूर्व विधायक महेंद्र बाल्मीकि तक के साथ अभद्र्रता की गई। विरोध करने वालों को पहले जनता ने नकारा और अब कार्यकर्ताओं ने भी नकार दिया। पार्टी के जिम्मेदारा पदों पर रहने वाले झूठ बोल रहे हैं उनका चारित्रिक पतन हो गया।
डीके शर्मा, जिला संयोजक भाजपा

मैं कभी वीरेंद्र सिंह के साथ नहीं गया। मैं तो डीके शर्मा का अनुमोदक हूं। जो लोग मेरी निष्ठा पर सवाल उठा रहे हैं, उन्होंने वीरेंद्र सिंह की राजनीति खत्म करने के लिए यह साजिश रची।
जेपी गुप्ता, वरिष्ठ भाजपा नेता

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